सरकार ने बताई 8वें वेतन आयोग की टाइमलाइन, सैलरी में 20–35% बढ़ोतरी संभव
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हो चुका है और इसे 18 महीने में रिपोर्ट देनी है, जिसके बाद ही वेतन बढ़ोतरी पर फैसला होगा. अनुमान है कि कर्मचारियों की सैलरी में 20–35% तक बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन लाभ 2026 के अंत या 2027 में मिल सकता है.

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित 8वें वेतन आयोग को लेकर स्थिति अब कुछ हद तक स्पष्ट हो गई है. सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया जा चुका है. हालांकि, वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी और इसका वास्तविक लाभ कब मिलेगा, इस पर अभी अंतिम तस्वीर सामने आना बाकी है.
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने क्या बताया?
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में लिखित जवाब के जरिए बताया कि 8वें वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. यह आयोग कर्मचारियों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेगा. मंत्री ने यह भी साफ किया कि आयोग की सिफारिशें आने और सरकार द्वारा उन्हें मंजूरी मिलने के बाद ही इसके वित्तीय असर का स्पष्ट आकलन हो सकेगा.
आयोग ने अपनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सुझाव जुटाने का काम भी शुरू कर दिया है. इसके तहत मायगोव पोर्टल पर 18 बिंदुओं वाली एक विस्तृत प्रश्नावली जारी की गई है. केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों, कर्मचारी संगठनों, पेंशनभोगियों और आम नागरिकों से 31 मार्च 2026 तक ऑनलाइन सुझाव मांगे गए हैं. इन सुझावों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देगा.
विशेषज्ञों का क्या मानना है?
जहां तक वेतन वृद्धि लागू होने का सवाल है, विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा सकती हैं. हालांकि, वास्तविक भुगतान में देरी संभव है और कर्मचारियों को इसका लाभ 2026 के अंत या फिर 2027 में मिल सकता है. विशेषज्ञों का तर्क है कि पिछले वेतन आयोगों में भी इसी तरह की देरी देखी गई थी.
वेतन बढ़ोतरी के अनुमान को लेकर भी अलग-अलग आकलन सामने आ रहे हैं. जानकारों के मुताबिक, कर्मचारियों की सैलरी में लगभग 20 से 35 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है. फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है. वहीं, चूंकि 7वें वेतन आयोग की अवधि 1 जनवरी 2026 तक मानी जा रही है. इसलिए बकाया भी इसी तारीख से लागू हो सकते हैं. हालांकि, अंतिम फैसला देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई दर और सरकार की वित्तीय क्षमता पर निर्भर करेगा.


