युद्ध का असर: दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम बेकाबू, क्या भारत में भी बढ़ेगी कीमतें?

ईरान-इजरायल तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में उछाल आया है. कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जबकि भारत में फिलहाल राहत बनी हुई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: ईरान-इजरायल तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल तेज हो गई है, जिसका असर अब सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है. कई देशों में ईंधन के दाम तेजी से बढ़े हैं, हालांकि भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.

23 फरवरी 2026 तक जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें सामान्य थीं, वहीं युद्ध के बाद हालात पूरी तरह बदल गए. कच्चा तेल 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गया, जो करीब 45 प्रतिशत की उछाल को दर्शाता है.

कच्चे तेल की तेजी का सीधा असर आम आदमी पर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर अब लोगों की जेब पर पड़ने लगा है. ग्लोबल पेट्रोल प्राइस डॉट कॉम के अनुसार, पेट्रोल की औसत कीमत 1.20 डॉलर से बढ़कर 1.27 डॉलर प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 1.20 डॉलर से बढ़कर 1.33 डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गया है.

दक्षिण-पूर्व एशिया में ईंधन संकट गहराया

  • लाओस में डीजल की कीमतों में 72.4 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है.
  • वियतनाम में पेट्रोल 50 प्रतिशत और डीजल 65.8 प्रतिशत महंगा हुआ है.
  • कंबोडिया में डीजल 37.3 प्रतिशत तक बढ़ चुका है.

अफ्रीका और अमेरिका भी अछूते नहीं

नाइजीरिया में पेट्रोल 39.5 प्रतिशत और डीजल 62.5 प्रतिशत महंगा हो गया है.
संयुक्त राज्य अमेरिका में भी डीजल की कीमतों में 27.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि प्यूर्टो रिको में यह 25.1 प्रतिशत तक बढ़ गया है.

यूरोप में जर्मनी और स्पेन पर सबसे ज्यादा असर

जर्मनी में डीजल 25.3 प्रतिशत महंगा हुआ है.
स्पेन में यह बढ़ोतरी 25.6 प्रतिशत रही, जबकि बेल्जियम, डेनमार्क और फ्रांस में भी 15-20 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया.

भारत समेत कुछ देशों में अभी राहत

भारत, चीन, रूस और सऊदी अरब जैसे देशों में फिलहाल कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.
इसके अलावा अल्जीरिया, अर्जेंटीना, ब्राजील, मैक्सिको और वेनेजुएला में भी दाम नहीं बढ़े हैं.

क्या भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव भारत पर भी पड़ेगा. हालांकि, चुनावी माहौल को देखते हुए फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम मानी जा रही है.

भारत की अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

क्रूड में हर 1 डॉलर की वृद्धि से भारत के आयात बिल में करीब 2 अरब डॉलर का इजाफा होता है. इससे रुपये पर दबाव, सरकारी खर्च में बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. साथ ही ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी प्रभावित हो सकते हैं.

कुछ देशों में कीमतें घटीं भी

  • फिजी में पेट्रोल 4.3 प्रतिशत और डीजल 1.8 प्रतिशत सस्ता हुआ है.
  • मेडागास्कर में दोनों ईंधनों की कीमतों में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है.
  • जाम्बिया में पेट्रोल 4.6 प्रतिशत सस्ता हुआ है.

कुछ जगह विरोधाभासी स्थिति

  • सीरिया में पेट्रोल सस्ता हुआ, जबकि डीजल महंगा हो गया.
  • उरुग्वे में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है.

लंबे युद्ध से बढ़ सकती हैं मुश्किलें

विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों का असर रिटेल बाजार में पूरी तरह दिखने में 2-3 हफ्ते लगते हैं. ऐसे में आने वाले समय में और देशों में कीमतें बढ़ सकती हैं. यदि युद्ध लंबा चला, तो स्थिर कीमत वाले देशों में भी बढ़ोतरी संभव है.

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