'मिडिल ईस्ट में युद्ध का डर या डॉलर डूबने की आहट? NRI ने भारतीय बैंकों से खींचा पैसा'
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच विदेशों में रहने वाले भारतीयों की चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है. RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ एक महीने में भारतीय बैंकों से करीब 2 अरब डॉलर निकाले गए. एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती अनिश्चितता और आर्थिक डर ने NRI निवेशकों को सतर्क कर दिया है.

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर भी दिखाई देने लगा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च महीने में एनआरआई खातों से करीब 2 अरब डॉलर निकाले गए. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता और खाड़ी देशों की आर्थिक चिंता ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को सतर्क कर दिया है. कई एनआरआई अब अपने निवेश और बचत को लेकर नई रणनीति बना रहे हैं. बैंकिंग सेक्टर में इस बदलाव को गंभीर संकेत माना जा रहा है.
एक महीने में बड़ी गिरावट दर्ज
RBI के आंकड़ों के अनुसार फरवरी के मुकाबले मार्च के आखिर तक भारतीय बैंकों में कुल NRI जमा घटकर 165.65 अरब डॉलर रह गई. इससे पहले यह आंकड़ा 167.58 अरब डॉलर था. यानी सिर्फ एक महीने में करीब 2 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज हुई. विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट सामान्य नहीं मानी जा रही. पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया है. इसका असर आने वाले महीनों में और ज्यादा दिखाई दे सकता है.
खाड़ी देशों से सबसे ज्यादा असर
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और वहां की आर्थिक स्थिति सीधे तौर पर भारत की NRI जमा पर असर डालती है. यदि ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है तो तेल बाजार और नौकरियों पर दबाव बढ़ सकता है. यही वजह है कि कई प्रवासी भारतीय अपने पैसों को लेकर सतर्क हो गए हैं. बैंकिंग अधिकारियों का कहना है कि सबसे ज्यादा निकासी NRE और NRO खातों से हुई है. इन खातों का इस्तेमाल मुख्य रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय करते हैं. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पश्चिम एशिया की स्थिति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
किन खातों से निकले सबसे ज्यादा पैसे
RBI डेटा के मुताबिक Non-Resident External यानी NRE खातों में जमा राशि घटकर 98.56 अरब डॉलर तक पहुंच गई. वहीं Non-Resident Ordinary यानी NRO खातों में भी गिरावट दर्ज हुई और यह आंकड़ा 33.33 अरब डॉलर रह गया. हालांकि Foreign Currency Non-Resident यानी FCNR खातों में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि FCNR खातों का इस्तेमाल अमेरिका और यूरोप में रहने वाले भारतीय ज्यादा करते हैं. इसलिए उन खातों पर पश्चिम एशिया के तनाव का असर सीमित रहा. लेकिन खाड़ी देशों से जुड़े खातों में घबराहट साफ दिखाई दी है.
तेल बाजार और युद्ध की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है. तेल की कीमतें बढ़ने से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार प्रभावित हो सकता है. ऐसे में वहां काम कर रहे भारतीय अपनी बचत को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं. कई एनआरआई अब अपने पैसे को दूसरे निवेश विकल्पों में शिफ्ट करने पर भी विचार कर रहे हैं. बैंकिंग सेक्टर के जानकारों के मुताबिक यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है. आने वाले महीनों में हालात और बदल सकते हैं.
भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी नजर
एनआरआई जमा भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. इससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलती है और बैंकिंग सेक्टर को भी सहारा मिलता है. यदि लगातार निकासी जारी रहती है तो इसका असर भारतीय वित्तीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है. हालांकि फिलहाल विशेषज्ञ स्थिति को नियंत्रण में मान रहे हैं. लेकिन पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर सरकार और बैंकिंग एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं. आने वाले समय में यह मुद्दा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम साबित हो सकता है.


