1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू, 60 साल पुराना कानून जाएगा इतिहास के पन्नों में, टैक्सपेयर्स को मिलेगी बड़ी राहत

1 अप्रैल से भारत में टैक्स का बड़ा बदलाव आ रहा है. 64 साल पुराना इनकम टैक्स एक्ट 1961 अब अलविदा कहेगा और उसकी जगह लेगा नया इनकम टैक्स एक्ट 2025.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: देश में टैक्स सिस्टम को लेकर सबसे बड़ी शिकायत उसकी जटिलता रही है, जिसे दूर करने के लिए सरकार अब एक बड़ा बदलाव करने जा रही है. 1 अप्रैल से पूरे देश में इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू होगा, जो करीब 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा. सरकार का कहना है कि नया कानून आम लोगों के लिए टैक्स को समझना और भरना दोनों आसान बना देगा.

डिजिटल युग में भी पुराने कानून की भारी-भरकम भाषा और सैकड़ों संशोधनों ने टैक्सपेयर्स को उलझा रखा था. नौकरीपेशा लोग, छोटे कारोबारी और सीनियर सिटीज़न्स के लिए नियम इतने पेचीदा हो चुके थे कि बिना एक्सपर्ट की मदद के टैक्स फाइल करना मुश्किल हो गया था. इसी पृष्ठभूमि में अब नया टैक्स कानून लाया गया है.

क्यों बदला गया 64 साल पुराना कानून

इनकम टैक्स एक्ट 1961 ऐसे दौर में बना था जब न तो डिजिटल लेन-देन आम थे और न ही आज जैसी आधुनिक अर्थव्यवस्था थी. समय के साथ इसमें बार-बार बदलाव होते रहे, जिससे कानून जटिल होता चला गया. सरकार का मानना है कि अब इसे पूरी तरह नए सिरे से लिखना जरूरी हो गया था.

इनकम टैक्स एक्ट 2025 में क्या है नया?

सरकार के मुताबिक नया कानून लगभग 50 फीसदी छोटा होगा. इसमें सरल भाषा का इस्तेमाल किया गया है ताकि आम टैक्सपेयर भी बिना विशेषज्ञ की मदद के नियम समझ सके. कई गैरज़रूरी सेक्शन हटाए गए हैं और पुराने अप्रासंगिक प्रावधानों को खत्म किया गया है, जिससे विवाद और मुकदमेबाजी कम होने की उम्मीद है.

टैक्स स्लैब वही, प्रक्रिया आसान

इस नए कानून में टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. आपकी मौजूदा टैक्स स्लैब पहले जैसी ही रहेगी. यह कानून रेवेन्यू न्यूट्रल है, यानी सरकार की आय पर भी इसका असर नहीं पड़ेगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि टैक्स से जुड़े नियम अब ज्यादा साफ और पारदर्शी होंगे.

असेसमेंट ईयर का झंझट खत्म

अब तक टैक्स सिस्टम में प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे शब्द लोगों को भ्रमित करते थे. नए कानून में इनकी जगह सिर्फ एक शब्द होगा - टैक्स ईयर. इससे ITR फाइल करना और आसान होगा. इसके अलावा अब देर से रिटर्न भरने पर भी टैक्सपेयर्स को TDS रिफंड का अधिकार मिलेगा.

आगे के सभी बदलाव इसी कानून में

सरकार ने साफ किया है कि बजट 2026-27 में टैक्स से जुड़े जितने भी नए नियम आएंगे. चाहे वे पर्सनल टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स या HUF से जुड़े हों. सभी को इसी इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत शामिल किया जाएगा. संसद की मंजूरी के बाद इसके नियम और टैक्स फॉर्म तैयार किए जा रहे हैं.

पहले भी हो चुकी है कोशिश

टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की कोशिश पहले भी हुई थी. 2010 में डायरेक्ट टैक्स कोड लाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह लागू नहीं हो सका. 2017 में बनी एक कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अब यह नया कानून तैयार हुआ है. इसका उद्देश्य साफ है टैक्स वही रहेगा, लेकिन उसे समझना और भरना अब कहीं ज्यादा आसान होगा.

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