अब सिगरेट की लंबाई तय करेगी दाम! 1 फरवरी से 2 से 8 रुपये तक महंगी, आपकी ब्रांड पर कितना असर?

1 फरवरी 2026 से सिगरेट पीने वालों की जेब का बजट ‘फुल टेंशन’ मोड में आने वाला है. सरकार ने अब सिगरेट पर सिर्फ जीएसटी नहीं, बल्कि उसकी लंबाई के हिसाब से भी नई एक्साइज ड्यूटी लगा दी है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स की गणना के तरीके में बड़ा बदलाव कर दिया है, जो अगले महीने यानी 1 फरवरी 2026 से लागू होगा. अब तंबाकू उत्पादों की कीमत तय करने में सिर्फ ब्रांड और पैकेट नहीं, बल्कि सिगरेट की लंबाई भी अहम भूमिका निभाएगी. यह नया नियम सरकार की स्वास्थ्य-संबंधी नीतियों और राजस्व बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है.

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से धूम्रपान करने वालों की जेब पर भारी असर पड़ेगा. वस्तु एवं सेवा कर (GST) के अलावा अब ‘स्पेसिफिक सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी’ सीधे तौर पर सिगरेट की लंबाई और उसकी श्रेणी के आधार पर लगेगी. यानी लंबी और प्रीमियम सिगरेट पीने वालों के लिए खर्च पहले से काफी बढ़ जाएगा.

सिगरेट की लंबाई तय करेगी टैक्स का भार

सरकार की नई व्यवस्था के तहत एक्साइज ड्यूटी प्रति 1,000 सिगरेट स्टिक के हिसाब से निर्धारित होगी. उदाहरण के तौर पर:-

  • बिना फिल्टर वाली 65 मिमी से छोटी सिगरेट पर 2.05 रुपये प्रति स्टिक का टैक्स.

  • फिल्टर वाली 65 मिमी से छोटी सिगरेट पर 2.10 रुपये प्रति स्टिक.

  • 65-70 मिमी लंबी मिड-रेंज फिल्टर सिगरेट पर 3.60 से 4 रुपये प्रति स्टिक.

  • 70-75 मिमी लंबी सिगरेट पर 5.40 रुपये प्रति स्टिक.

  • 75 मिमी से लंबी प्रीमियम सिगरेट पर 8.50 रुपये या उससे अधिक प्रति स्टिक.

2017 के बाद सबसे बड़ा बदलाव

तंबाकू उत्पादों पर यह नया टैक्स ढांचा 2017 के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है. जब देश में जीएसटी लागू हुआ था, तब सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बहुत कम थी, लगभग 5 रुपये प्रति 1,000 स्टिक. अब यह ढांचा पहले से सख्त है और जीएसटी के ऊपर भी लागू होगा. वर्तमान में तंबाकू उत्पादों पर 18 से 40 प्रतिशत तक जीएसटी लगता है, और नए टैक्स के जुड़ने से कुल टैक्स बोझ उत्पाद की कीमत का करीब 53 प्रतिशत तक होगा.

सरकार का उद्देश्य

इस कड़े फैसले के पीछे वित्त मंत्रालय के कई उद्देश्य हैं. सबसे प्रमुख कारण है लोगों की सेहत. महंगी सिगरेट की वजह से खपत घटेगी और लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होंगे. इसके अलावा, टैक्स चोरी रोकना और सरकारी राजस्व बढ़ाना भी लक्ष्य में शामिल है.

वैश्विक मानकों के करीब

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि तंबाकू उत्पादों की रिटेल कीमत का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा टैक्स के रूप में होना चाहिए. भारत में कुल टैक्स बोझ अभी भी WHO के मानक से कम है. सरकार धीरे-धीरे अपनी तंबाकू टैक्स नीति को वैश्विक मानकों के करीब लाने की कोशिश कर रही है, ताकि पब्लिक हेल्थ के मोर्चे पर स्थिति में सुधार हो सके.

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