JNU के नए हॉस्टल नियमों से बढ़ी टेंशन, विवाहित छात्रों पर बढ़ेगा खर्च
जवाहर लाल विश्वविद्यालय ने विवाहित पीएचडी छात्रों के लिए हॉस्टल नियमों में बदलाव करते हुए फीस बढ़ाने और रहने की अवधि अधिकतम चार साल तय करने का फैसला किया है.

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने अपने हॉस्टल नियमों में बड़े बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है. विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी ड्राफ्ट हॉस्टल मैनुअल के तहत विवाहित पीएचडी छात्रों के लिए नई व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसमें हॉस्टल में रहने का खर्च बढ़ाने के साथ कई अन्य नियम भी शामिल किए गए हैं. नए प्रस्तावित नियमों को लेकर छात्रों के बीच चर्चा तेज हो गई है.
सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि बढ़ी
विश्वविद्यालय के महानदी हॉस्टल में रहने वाले विवाहित शोधार्थियों के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि बढ़ा दी गई है. अब छात्रों को पहले की तुलना में ज्यादा रिफंडेबल सिक्योरिटी जमा करनी होगी. इसके अलावा कमरे का किराया, बिजली-पानी का बिल और अन्य सुविधाओं का शुल्क अलग से देना होगा. प्रशासन का कहना है कि हॉस्टल के रखरखाव और सुविधाओं पर बढ़ते खर्च को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
ड्राफ्ट नीति में यह भी साफ किया गया है कि हॉस्टल फीस स्थायी नहीं रहेगी. विश्वविद्यालय समय-समय पर वास्तविक खर्च के आधार पर किराया और अन्य शुल्कों में बदलाव कर सकेगा. यानी आने वाले वर्षों में छात्रों को हॉस्टल में रहने के लिए और अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं.
नई नीति के तहत पीएचडी छात्रों के हॉस्टल में रहने की अवधि भी सीमित कर दी गई है. अब किसी भी शोधार्थी को एडमिशन की तारीख से अधिकतम चार साल तक ही हॉस्टल सुविधा मिलेगी. इसके बाद उन्हें कमरा खाली करना होगा. प्रशासन का तर्क है कि इससे नए छात्रों को भी हॉस्टल आवंटन का मौका मिल सकेगा और सीमित सीटों का बेहतर इस्तेमाल हो पाएगा.
महिला शोधार्थियों को लेकर भी नए नियमों में विशेष प्रावधान किए गए हैं. गर्भवती छात्राओं और छोटे बच्चों की देखभाल करने वाली महिलाओं को हॉस्टल आवंटन में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव रखा गया है. विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे महिला छात्रों को रिसर्च जारी रखने में सहूलियत मिलेगी.
शपथ पत्र देना अनिवार्य
JNU ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए हॉस्टल नियम केवल भारतीय छात्रों पर ही नहीं बल्कि विदेशी छात्रों पर भी समान रूप से लागू होंगे. हॉस्टल आवंटन से पहले सभी छात्रों को नियमों के पालन से जुड़ा एक शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा.
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार हर साल हॉस्टल सीटों की तुलना में ज्यादा आवेदन आते हैं. इसी वजह से हॉस्टल आवंटन प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त और व्यवस्थित बनाने का निर्णय लिया गया है. प्रशासन का कहना है कि हॉस्टल सुविधा केवल पात्र छात्रों को तय नियमों के अनुसार ही दी जाएगी.


