Dhurandhar 2 Review: अक्षय खन्ना की कमी पड़ी भारी, लेकिन रणवीर सिंह ने बचाई फिल्म... क्लाइमेक्स ने मचाया धमाल

‘धुरंधर: द रिवेंज’ में रणवीर सिंह का दमदार अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है. हालांकि पहला भाग थोड़ा कमजोर लगता है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी मजबूत होती है और क्लाइमेक्स दर्शकों को प्रभावित करता है.

Shraddha Mishra

मुंबई: अगर फिल्मी गलियारों की चर्चाओं पर भरोसा करें, तो धुरंधर: द रिवेंज कभी अलग फिल्म के तौर पर बनने वाली ही नहीं थी. शुरुआत में इसे एक ही बड़ी कहानी के रूप में पेश करने की योजना थी. लेकिन पहली फिल्म की रिलीज से पहले मेकर्स को इसकी कहानी में इतना दम नजर आया कि इसे दो हिस्सों में बांटने का फैसला लिया गया. अब दर्शकों के सामने करीब तीन घंटे की पहली फिल्म के बाद लगभग चार घंटे की यह दूसरी कड़ी है.

फिल्म बिना समय गंवाए सीधे हमजा अली मजारी यानी जसकिरत सिंह रंगी की कहानी में उतर जाती है. एक गहरे व्यक्तिगत दर्द से गुजरता यह किरदार धीरे-धीरे अपने मिशन की ओर बढ़ता है. कहानी तब नया मोड़ लेती है जब उसे देश के लिए जासूस बनने का मौका मिलता है. पहले भाग के अंत के बाद की घटनाओं को आगे बढ़ाते हुए यह फिल्म दिखाती है कि कैसे रहमान डकैत की मौत के बाद सत्ता का खाली स्थान पैदा होता है. इसी मौके का फायदा उठाकर हमजा अंडरवर्ल्ड में अपनी पकड़ मजबूत करने निकल पड़ता है.

संघर्ष और जोखिम से भरा सफर

हमजा का मिशन आसान नहीं है. उसे हर कदम पर अपनी पहचान, रिश्तों और यहां तक कि अपनी जान तक को खतरे में डालना पड़ता है. फिल्म दिखाती है कि अंडरवर्ल्ड में ऊपर उठने की कीमत कितनी भारी हो सकती है. हालांकि कहानी छह हिस्सों में बांटी गई है, लेकिन इस बार घटनाओं की गहराई थोड़ी कम महसूस होती है. खासतौर पर अक्षय खन्ना के किरदार की अनुपस्थिति दर्शकों को जरूर खलेगी.

पहला हाफ बनाम दूसरा हाफ

फिल्म का पहला हिस्सा एक्शन से भरपूर है, लेकिन इसमें कुछ कमजोरियां भी नजर आती हैं. कई जगह कहानी थोड़ी बनावटी लगती है और कुछ दृश्य आपको कहानी से जोड़ने के बजाय बाहर निकाल देते हैं. लेकिन जैसे ही इंटरवल होता है, फिल्म पूरी तरह बदल जाती है. दूसरा भाग ज्यादा मजबूत, दिलचस्प और संतुलित लगता है. क्लाइमेक्स की ओर बढ़ती कहानी दर्शकों को बांधे रखती है और अंत में शानदार प्रभाव छोड़ती है.

रणवीर सिंह का दमदार प्रदर्शन

इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका अभिनय है. रणवीर सिंह ने दो अलग-अलग व्यक्तित्व वाले किरदारों को बेहद सहजता से निभाया है. उनका दर्द, संघर्ष और जुनून साफ महसूस होता है. अर्जुन रामपाल, संजय दत्त और आर माधवन भी अपने-अपने किरदारों में अच्छे लगते हैं, लेकिन कुछ किरदारों को पर्याप्त स्क्रीन टाइम नहीं मिल पाता. फिर भी, छोटे रोल में भी कलाकार अपनी छाप छोड़ने में सफल रहते हैं.

अधूरी नहीं, लेकिन पूरी तरह परफेक्ट भी नहीं

धुरंधर: द रिवेंज एक महत्वाकांक्षी फिल्म है, जो अपने पहले भाग की ऊंचाइयों को पूरी तरह छू नहीं पाती. कहानी और लेखन में कुछ कमियां हैं, लेकिन दूसरा भाग इन कमजोरियों को काफी हद तक संभाल लेता है. रणवीर सिंह का शानदार अभिनय और दमदार क्लाइमेक्स फिल्म को एक मजबूत अनुभव बनाते हैं. यह फिल्म भले ही पहली जितनी यादगार न हो, लेकिन यह कहानी को आगे बढ़ाने और दो भागों में बांटने के फैसले को सही ठहराती है.

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