'पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच...', चीनी विदेश मंत्री ने भारत के साथ रिश्तों पर दिया बड़ा बयान

भारत-चीन सीमा वार्ता के 24वें दौर में वांग यी और अजीत डोभाल ने सीमाओं पर शांति, द्विपक्षीय संबंधों के सुधार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा की. कज़ान में हुई नेताओं की मुलाकात को रिश्तों में नई गति देने वाला कदम बताया गया. यह वार्ता राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने पर हुई.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

India-China Relation: चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने विशेष प्रतिनिधि स्तर की सीमा वार्ता के 24वें दौर के दौरान कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के बीच उत्पन्न हुए मसले दोनों देशों के लोगों के हित में नहीं रहे. उन्होंने अक्टूबर 2024 में कज़ान (रूस) में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात को द्विपक्षीय रिश्तों में एक नई दिशा और गति देने वाला मील का पत्थर बताया.

सीमाओं पर शांति और स्थिरता

वांग यी ने बताया कि पिछले 23वें दौर की वार्ता में दोनों पक्षों ने मतभेदों को दूर करने, सीमाओं पर स्थिरता लाने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनायी. उन्होंने कहा कि हमने विशिष्ट लक्ष्यों की पहचान की और एक कार्यशील रूपरेखा तैयार की. अब सीमाओं पर स्थिरता लौटने से हमें खुशी है.

द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के अवसर

चीनी मंत्री ने कहा कि मौजूदा संवाद का दौर द्विपक्षीय संबंधों के लिए सुधार और विकास का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है. उन्होंने दोनों पक्षों से नेताओं द्वारा तय रणनीतिक मार्गदर्शन का पालन करने, विश्वास बढ़ाने, सहयोग के क्षेत्रों का विस्तार करने और सीमा संघर्ष को उचित ढंग से सुलझाने का आह्वान किया.

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की तैयारी

वांग ने शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा को महत्व देते हुए कहा कि चीन का मानना है कि भारत भी तियानजिन में सफल सम्मेलन में योगदान देगा. उन्होंने इस सम्मेलन को दोनों देशों के स्थिर और स्वस्थ संबंध के लिए एक मंच बताया, जिसे विकासशील देशों की ओर से स्वागत भी किया जाता है.

डोभाल ने क्या कहा?

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने वांग यी का दिल्ली में स्वागत करते हुए कहा कि हाल के महीनों में हम द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ोतरी देख रहे हैं. सीमाएँ शांत रहीं, शांति और सौहार्द बना रहा और हमारा यह मेल सकारात्मक रहा है." उन्होंने कज़ान में हुई मुलाकात को इस सुधार की नींव बताया और 24वें दौर की वार्ता की सफलता की उम्मीद जताई.

सात दशकों का राजनयिक सफर

डोभाल ने इस वार्ता को भारत–चीन के बीच 75वीं राजनयिक वर्षगांठ के अवसर से जोड़ते हुए कहा कि यह जश्न मनाने का समय है. उन्होंने दोनों देशों के राजनयिकों, सैनिकों और टीमों के साझा प्रयासों के माध्यम से मिली उस नई ऊर्जा और गति की ओर इशारा किया जिसने हाल की प्रगति को संभव बनाया.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag