लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश बनाना चाहते हैं...SC में सोनम वांगचुक की याचिका पर सुनवाई के दौरान बोला केंद्र
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत का बचाव किया है. वांगचुक पर युवाओं को भड़काने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने का आरोप है. सरकार ने कहा कि उनकी हिरासत कानूनी प्रक्रिया के तहत है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है.

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत का मजबूत बचाव किया है. यह मामला उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें वांगचुक की एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत हिरासत को चुनौती दी गई थी.सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्न वराले शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 के तहत अदालत हिरासत आदेश को अपील की तरह नहीं देखती. मुख्य जांच यह होती है कि हिरासत का आधार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है या नहीं.
आपको बता दें कि केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत को यह जांचना नहीं है कि वह खुद संतुष्ट है या नहीं, बल्कि यह देखना है कि जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश पारित करते समय संतुष्टि प्राप्त की थी या नहीं.मेहता ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट ने वांगचुक के भाषणों को युवाओं को भड़काने वाला माना, जो सार्वजनिक शांति के लिए खतरा पैदा कर सकते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक ने युवाओं को नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों की तरह हिंसक आंदोलन और राजनीतिक अस्थिरता की ओर ले जाने की कोशिश की. ऐसे बयान लद्दाख जैसे संवेदनशील सीमा क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं, जहां सेना की सप्लाई चेन और रक्षा महत्वपूर्ण है.
वांगचुक ने अलगाव की भावना फैलाई
सरकार ने कहा कि वांगचुक ने केंद्र सरकार को 'वे' और लद्दाखियों को 'हम' कहकर अलगाव की भावना फैलाई. उनके भाषणों में गैर-हिंसक तरीके से शुरू करके बाद में हिंसा भड़काने वाले संदेश थे, जैसे अरब स्प्रिंग या आत्मदाह का जिक्र. मेहता ने जोर दिया कि गांधीजी के नाम का इस्तेमाल सिर्फ शुरुआत और अंत में मुखौटा था.हिरासत की प्रक्रिया पर मेहता ने कहा कि आदेश सही तरीके से पारित हुआ और चार घंटे के अंदर अमल किया गया. एक डीआईजी स्तर के अधिकारी ने वांगचुक से मुलाकात की, उनके भाषणों के वीडियो क्लिप दिखाए और उन्होंने उन्हें स्वीकार किया.
एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया
बता दें कि सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था. यह कार्रवाई लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई, जिसमें चार लोगों की मौत और 90 घायल हुए थे. फिलहाल वे राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं. एनएसए के तहत हिरासत अधिकतम 12 महीने तक हो सकती है, लेकिन इसे पहले भी खत्म किया जा सकता है.सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और यह मामला लद्दाख की मांगों, अभिव्यक्ति की आजादी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन पर बड़ा सवाल उठाता है.


