महिलाओं के साथ बलात्कार, सिर की खाल बालों समेत उतारे...प्रदर्शनों को कुचलने के लिए ईरान ने रेप को हथियार की तरह किया इस्तेमाल

ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर क्रूर दमन की खबरें सामने आई हैं. मिशेल अब्दोल्लाही ने आरोप लगाया है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने महिलाओं के साथ बलात्कार और यौन हिंसा की है. शवों को परिवारों को नहीं लौटाया जा रहा, बल्कि जलाया जा रहा है. विरोध प्रदर्शन आर्थिक संकट से शुरू होकर खामेनेई के शासन को हटाने की मांग तक पहुंच गया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर क्रूर दमन की खबरें दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं. अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार ने बड़े पैमाने पर विरोध को दबाने के लिए कड़ी कार्रवाई की है. तेहरान में जन्मे और जर्मनी में रहने वाले ईरानी-जर्मन पत्रकार मिशेल अब्दोल्लाही ने बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं के साथ यौन हिंसा का इस्तेमाल किया है. महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, उनके शरीर को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया गया ताकि लोग डर जाएं और आगे विरोध न करें.

मिशेल अब्दोल्लाही के चौंकाने वाले दावे

आपको बता दें कि मिशेल अब्दोल्लाही ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में बताया कि उन्हें प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी मिली है. इनमें उन महिलाओं की कहानियां हैं जो हिजाब पहनने से मना करने, मोटरसाइकिल चलाने या खामेनेई की जलती तस्वीरों से सिगरेट जलाने जैसी बातों के लिए ईरानी क्रांतिकारी गार्ड (आईआरजीसी) के खिलाफ खड़ी हुईं. अब्दोल्लाही का कहना है कि महिलाओं के शव परिवारों को नहीं लौटाए जा रहे हैं या बहुत कम लौट रहे हैं.

महिलाओं के साथ बलात्कार किया...
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता है, उनके गर्भाशय निकाल दिए जाते हैं, सिर की खाल बालों समेत उतार दी जाती है और शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान छोड़ दिए जाते हैं. उन्होंने कहा कि खामेनेई का शासन अपने लोगों के खिलाफ बलात्कार को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. बच्चों को भी ऐसी हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है.


"हम तुम्हें नहीं मारेंगे,पहले बलात्कार करेंगे...
ये आरोप जर्मन अखबार 'डाई वेल्ट' की रिपोर्टों से मिलते-जुलते हैं. अखबार ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दिए हैं जिसमें सुरक्षा कर्मियों ने गिरफ्तार महिलाओं को बलात्कार की धमकी दी. एक गवाह ने बताया कि उसने अधिकारियों को घायल और स्वस्थ युवतियों को एक-दूसरे पर ढेर करके गाड़ी में फेंकते देखा. वे कह रहे थे, "हम तुम्हें नहीं मारेंगे. पहले बलात्कार करेंगे, फिर मार डालेंगे." इसके बाद गाड़ी लेकर चले गए. अब्दोल्लाही ने यह भी कहा कि शासन यातना के सबूत मिटाने की कोशिश कर रहा है. शवों को परिवारों को नहीं लौटाया जाता, बल्कि पहले जला दिया जाता है ताकि हिंसा के निशान छिप जाएं.

16 साल की लड़की के साथ यौन उत्पीड़न...
ब्रिटेन के अखबार 'द गार्जियन' ने भी करमानशाह शहर में एक 16 साल की लड़की के साथ यौन उत्पीड़न की घटना की रिपोर्ट की. कुर्दिस्तान मानवाधिकार नेटवर्क के रेबिन रहमानी ने बताया कि स्थानांतरण के दौरान सुरक्षा बलों ने लाठियों से लड़कियों के शरीर को छुआ और गुदा क्षेत्र पर दबाव डाला.

विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 
ये सब दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद सामने आया है. शुरुआत आर्थिक संकट से हुई थी, जैसे महंगाई, रुपये की गिरावट और जीवनयापन की मुश्किलें. लेकिन जल्द ही यह खामेनेई के शासन को हटाने की मांग में बदल गया. जनवरी 2026 में पूरे ईरान में प्रदर्शन फैल गए. सरकार ने 8 जनवरी को इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय संचार बंद कर दिया. आईआरजीसी के बासिज मिलिशिया और इराक से आए हजारों शिया लड़ाकों को तैनात किया गया. खामेनेई ने इसे "तख्तापलट जैसा" बताया और कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया.

मौतों की संख्या पर अलग-अलग अनुमान
मौतों की संख्या पर अलग-अलग आंकड़े हैं. ईरान की सरकारी एजेंसी ने 3,117 मौतें बताईं, जिनमें से ज्यादातर सुरक्षा बलों या निर्दोष लोगों को बताया. लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक अधिकारी ने कम से कम 5,000 मौतें बताईं. अमेरिका स्थित मानवाधिकार समूहों ने 3,308 मौतों की पुष्टि की और हजारों मामलों की जांच चल रही है. कुछ रिपोर्टों में मौतें 30,000 से ज्यादा बताई गई हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर नरसंहार शामिल हैं. इंटरनेट बंद होने से सही जानकारी बाहर आना मुश्किल है.

ईरानी लोगों की हिम्मत
इतनी क्रूरता के बावजूद अब्दोल्लाही कहते हैं कि ईरानी लोग हार नहीं मान रहे. वे रोज लोगों से बात करते हैं और सुनते हैं कि हर किसी ने अपनों को खो दिया है. पूरा देश कब्रिस्तान जैसा लग रहा है, लेकिन लोग कहते हैं कि वे लड़ते रहेंगे. यह ईरान के इतिहास में 1979 की क्रांति के बाद का सबसे बड़ा विरोध था, जो आर्थिक दुख से शुरू होकर आजादी की मांग तक पहुंच गया. दुनिया भर में मानवाधिकार संगठन इन आरोपों की जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन ईरान सरकार इन सब को नकार रही है और विरोध को विदेशी साजिश बता रही है.

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