'लाउडस्पीकर किसी भी धर्म में अनिवार्य नहीं', बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, सरकार को दिया अहम निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने लाउडस्पीकर को लेकर एक आदेश में कहा कि किसी भी धर्म में लाउडस्पीकर अनिवार्य हिस्सा नहीं है. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह धार्मिक संस्थाओं को ध्वनि स्तर को नियंत्रित करने के लिए तंत्र अपनाने का निर्देश दे, जिसमें स्वत: डेसिबल सीमा तय करने की ध्वनि सिस्टम भी शामिल हो.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

बॉम्बे हाईकोर्ट ने लाउडस्पीकर को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने कहा कि लाउडस्पीकर बजाना किसी धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है. अदालत ने ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करने वाले लाउडस्पीकर पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा है कि अगर आवाज के खिलाफ शिकायत आती है, तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए.  उसने अपने फैसले में आगे कहा कि पहले समझाएं, दूसरी बार उल्लंघन होने पर स्पीकर जब्त करें. इस फैसले से पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है.

शोर स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है

जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस एससी चांडक की खंडपीठ ने कहा कि शोर स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है. कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि अगर उसे लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाती है तो उसके अधिकार किसी भी तरह से प्रभावित होंगे. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह धार्मिक संस्थानों को ऑटो-डेसिबल सीमा के साथ कैलिब्रेटेड साउंड सिस्टम समेत शोर के स्तर को नियंत्रित करने के लिए तंत्र अपनाने का निर्देश दे.

अदालत ने यह फैसला कुर्ला उपनगर के 2 आवास संघों, जागो नेहरू नगर रेजिडेंट्स वेलफेयर  वेलफेयर एसोसिएशन और शिवसृष्टि को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटीज एसोसिएशन लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनाया है. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि में क्षेत्र में मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है.

लाउडस्पीकर धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं

पीठ ने कहा कि मुंबई एक महानगरीय शहर है और जाहिर है कि शहर के हर हिस्से में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं. यह जनहित में है कि ऐसी अनुमति न दी जाए. ऐसी अनुमति न देने से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 या 25 के तहत अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है. लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किसी भी धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है.

अधिकारी मूकदर्शक न बनें

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार और अन्य प्राधिकारियों का यह ‘कर्तव्य’ है कि वे कानून के प्रावधानों के तहत निर्धारित सभी आवश्यक उपाय अपनाकर कानून को लागू करें. फैसले में कहा गया, एक लोकतांत्रिक राज्य में ऐसी स्थिति नहीं हो सकती कि कोई व्यक्ति/व्यक्तियों का समूह/व्यक्तियों का संगठन कहे कि वह देश के कानून का पालन नहीं करेगा और कानून लागू करने वाले अधिकारी मूकदर्शक बने रहेंगे. इसमें कहा गया है कि आम नागरिक लाउडस्पीकर और/या एम्प्लीफायर के इन घृणित उपयोग के असहाय शिकार हैं.

लाउडस्पीकर की शिकायत मिलने पर करें कार्रवाई

अदालत ने कहा कि पुलिस को ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने वाले लाउडस्पीकर के खिलाफ शिकायतों पर शिकायतकर्ता की पहचान मांगे बिना कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ऐसे शिकायतकर्ताओं को निशाना बनाए जाने, दुर्भावना और घृणा से बचाया जा सके. अदालत ने मुंबई के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे सभी थानों को निर्देश जारी करें कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के खिलाफ कोई भी शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई हो.

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