हिंद महासागर में तनाव के बीच भारत ने ईरानी जहाज 'IRIS LAVAN' को दी कोच्चि में शरण
अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को डुबोने की घटना के बीच भारत ने तकनीकी खराबी झेल रहे ईरानी जहाज IRIS LAVAN को कोच्चि में शरण दी है.

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हाल ही में समुद्र में हुई एक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल, अमेरिका ने कुछ दिन पहले हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS डेना पर पनडुब्बी के जरिए हमला कर उसे डुबो दिया था. यह जहाज भारत में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेकर वापस लौट रहा था. इस घटना के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
ईरान ने भारत से मांगी मदद
इस बीच भारत सरकार के सूत्रों ने जानकारी दी है कि इस घटना से पहले भारत ने एक अन्य ईरानी जहाज की मदद की थी. बताया गया कि ईरान का जहाज IRIS LAVAN समुद्री अभ्यास में शामिल होने के लिए भारत आ रहा था, लेकिन रास्ते में उसमें तकनीकी खराबी आ गई. इसके बाद ईरान ने भारत से मदद मांगी और जहाज को सुरक्षित स्थान पर रुकने की अनुमति देने का अनुरोध किया.
सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को भारत को ईरान की ओर से यह अनुरोध मिला था. जांच के बाद भारतीय अधिकारियों ने स्थिति को देखते हुए जहाज को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति दे दी. इसके बाद 1 मार्च को आधिकारिक मंजूरी दी गई और जहाज 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचकर खड़ा हो गया. फिलहाल जहाज के 183 क्रू सदस्य कोच्चि में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं, जहां उन्हें जरूरी सहायता दी जा रही है.
वापस लौट रहा था IRIS डेना
दूसरी ओर, ईरानी युद्धपोत IRIS डेना भारत द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में शामिल होकर अपने देश लौट रहा था, तभी उस पर हमला हुआ. रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका की एक पनडुब्बी ने उस पर टॉरपीडो से हमला किया, जिससे जहाज गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया और समुद्र में डूबने लगा. इस घटना में बड़ी संख्या में ईरानी नाविक जहाज पर मौजूद थे.
बताया गया है कि हमले के बाद भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं ने राहत और बचाव अभियान चलाकर सहायता पहुंचाने की कोशिश की. हालांकि इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई. जहाज के डूबने के बाद ईरान ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि IRIS डेना एक प्रशिक्षण जहाज था और वह भारत में आयोजित नौसैनिक अभ्यास में मेहमान के रूप में शामिल होने आया था. उनके मुताबिक जहाज पर हथियार नहीं थे और ऐसे जहाज पर हमला करना गंभीर अपराध माना जाना चाहिए.
वहीं, अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी दुश्मन के युद्धपोत को टॉरपीडो हमले से डुबोया गया हैय यह जहाज भारतीय नौसेना के बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास मिलान में शामिल हुआ था, जिसमें 18 मित्र देशों के लगभग 42 युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल हुई थीं.


