'जुर्म बस इतना है कि वे मुसलमान हैं' गंगा नदी पर इफ्तार पार्टी मामले में असदुद्दीन ओवैसी का आया रिएक्शन
गंगा नदी में नाव पर सवार होकर इफ्तार पार्टी कर रहे 14 मुसलमानों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. अब इस पूरे मामले पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आया है, जिसमें वे कड़ी आलोचना कर रहे हैं.

नई दिल्ली: वाराणसी में गंगा नदी पर नाव में इफ्तार पार्टी के मामले ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है. रमजान के दौरान कुछ युवकों ने नदी के बीच नाव पर बैठकर इफ्तार किया, जिसमें बिरयानी खाई गई और अवशेष नदी में फेंके गए. इस वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया. अब इस पूरे मामले पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी नाराजगी जताई है.
वीडियो वायरल होने से बवाल
रमजान के पवित्र महीने में वाराणसी के गंगा घाट के पास एक नाव पर इफ्तार पार्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया. वीडियो में युवक बिरयानी खाते दिखे और मांस की हड्डियां गंगा में फेंकते नजर आए.
हिंदू संगठनों और भाजपा युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने इसे हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया. उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज हुआ.
वाराणसी में गंगा के बीच धारा में इफ़्तार पार्टी करना पड़ा महंगा, चिकन बिरयानी खाने और फेंकने पर मुकदमा दर्ज....
— Arjun Chaudharyy (@Arjun5chaudhary) March 17, 2026
हिंदूवादी संगठनों ने जताया रोष, pic.twitter.com/NJIxg1GuB2
पुलिस ने सख्त कार्रवाई की
पुलिस ने वीडियो की जांच के बाद 14 युवकों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया. मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 298, 299, 196(1)बी, 270, 279 के अलावा जल प्रदूषण निवारण अधिनियम की धारा 24 लगाई गई. आरोप है कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई और नदी में प्रदूषण फैला. पुलिस ने बताया कि जांच जारी है और कानूनी प्रक्रिया चल रही है.
ओवैसी का गुस्सा और सवाल
हैदराबाद में बोलते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि 14 युवकों ने नाव पर रोजा खोला, तो तुरंत केस दर्ज हो गया. उन्होंने पूछा, "गंगा में नाव पर खाना खाने से किसी की धार्मिक भावनाएं कैसे आहत होती है? क्या गंगा में सीवर का ढेर नहीं पड़ता?"
ओवैसी ने आगे कहा, "उनका एकमात्र जुर्म यह है कि वे मुसलमान है. रमजान में शराब की दुकानें खुली रही, क्या मेरी भावनाएं आहत नहीं हुई?" उन्होंने कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया और कहा कि अगर कोई गैर-मुस्लिम ऐसा करता तो शायद ऐसा न होता.
यह मामला अब सियासी रंग ले चुका है. एक तरफ धार्मिक भावनाओं और नदी की पवित्रता की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ ओवैसी जैसे नेता इसे मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव बता रहे हैं. गंगा को लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है, लेकिन क्या इफ्तार पार्टी करना अपराध है? यह सवाल अब सबके मन में है.


