बांग्लादेश ने चीनी राजदूत को 'चिकन नेक' के करीब जाने की दी इजाजत, भारत के लिए बढ़ी रणनीतिक चिंता

भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के बीच बांग्लादेश ने चीन के राजदूत को रणनीतिक रूप से संवेदनशील .चिकन नेक' के पास स्थित तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा करने की अनुमति दे दी है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: ढाका और नई दिल्ली के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच बांग्लादेश ने चीन के राजदूत को रणनीतिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी 'चिकन नेक' के नजदीक स्थित तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा करने की अनुमति दे दी है. यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत-बांग्लादेश संबंधों में कूटनीतिक खटास और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हैं.

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की मुख्य भूमि को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाली करीब 22 किलोमीटर लंबी संकरी भू-पट्टी है, जिसे देश की रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है. ऐसे में इस इलाके के पास चीनी गतिविधियों को लेकर स्वाभाविक रूप से नई चिंताएं उभरने लगी हैं.

तीस्ता परियोजना के तहत हुआ चीनी राजदूत का दौरा

बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने स्पष्ट किया है कि चीनी राजदूत याओ वेन की यह यात्रा तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना के तहत चल रहे तकनीकी मूल्यांकन से जुड़ी हुई है. सरकार का कहना है कि इस दौरे का उद्देश्य केवल परियोजना से संबंधित तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करना था.

पुराने बयानों की गूंज और भारत विरोधी प्रदर्शन

गौरतलब है कि मोहम्मद यूनुस के पिछले साल दिए गए कुछ विवादास्पद बयानों की गूंज दिसंबर में हुए भारत विरोधी प्रदर्शनों में सुनाई दी थी. इन प्रदर्शनों के दौरान ढाका समेत बांग्लादेश के कई शहरों में भारतीय राजनयिक सुविधाओं को निशाना बनाया गया था.

चीन टीएमपी को लागू करने के लिए उत्सुक

परियोजना क्षेत्र का दौरा करने वाली जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन ने कहा कि चीन तीस्ता मास्टर प्लान (टीएमपी) को जल्द से जल्द लागू करने के लिए उत्सुक है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, बांग्लादेश और चीन दोनों ही इस योजना को अमल में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि परियोजना की जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल काम शुरू करना संभव नहीं है.

भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए अहम है तीस्ता

तीस्ता नदी बांग्लादेश के उत्तरी जिलों में कृषि और आजीविका के लिए जीवन रेखा मानी जाती है. वहीं भारत के लिए भी, खासतौर पर पश्चिम बंगाल में, यह नदी उतनी ही महत्वपूर्ण है. यही कारण है कि तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा दशकों से लंबित है.

जल बंटवारे पर अब तक नहीं बन सकी सहमति

तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियों और चिंताओं के चलते अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है.

याओ-रहमान बैठक के बाद क्या कहा गया

रविवार को चीनी राजदूत याओ वेन और बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान के बीच हुई बैठक के बाद मुख्य सलाहकार यूनुस के प्रेस विंग ने X पर पोस्ट किया,"दोनों पक्षों ने आपसी हित के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और बांग्लादेश और चीन के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता और विकास सहयोग की पुष्टि की."

पोस्ट में आगे कहा गया, "चर्चा में तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना और प्रस्तावित बांग्लादेश-चीन मैत्री अस्पताल शामिल थे. इस संदर्भ में, चीनी राजदूत ने सूचित किया कि वे तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा करेंगे और चल रहे तकनीकी मूल्यांकन को शीघ्रता से पूरा करने के लिए चीन की प्रतिबद्धता को दोहराया."

लोकतांत्रिक परिवर्तन को लेकर चीन का समर्थन

प्रेस विंग के अनुसार, चीनी राजदूत ने बांग्लादेश में चल रहे लोकतांत्रिक परिवर्तन के लिए अपनी सरकार के निरंतर समर्थन की पुष्टि की और आगामी राष्ट्रीय चुनावों के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं भी दीं.

चीन से बुनियादी ढांचे में सहयोग की अपील

गौरतलब है कि 2024 में मुख्य सलाहकार नियुक्त किए गए मोहम्मद यूनुस ने 2025 में चीन में दिए एक साक्षात्कार के दौरान बीजिंग से आग्रह किया था कि वह क्षेत्र में "समुद्र के एकमात्र संरक्षक" के रूप में अपनी रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाते हुए बांग्लादेश में मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचा विकसित करने में सहयोग करे.

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