भागकर शादी करने वाली लड़कियों के लिए SIR बना मुसीबत, अब आ रही मायके की याद

अपने घरवालों को छोड़ भागकर प्रेम विवाह करने वाली महिलाओं को अब सरकारी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है. उनके लिए SIR एक ऐसी परिस्थिति बना दिया है, जिसके लिए उन्हें अपने मायके वालों के साथ की जरूरत पड़ रही है.

Sonee Srivastav

लव मैरिज कर अपने पसंद के साथी के साथ जीवन शुरू करना जितना आसान लगता है, उतना ही मुश्किल तब हो जाता है जब सरकारी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है. हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) ने कई महिलाओं को ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है, जहां उन्हें अपने मायके से दस्तावेज चाहिए, लेकिन परिवार मदद करने को तैयार नहीं है.

प्रेम विवाह के बाद दस्तावेजों की सबसे बड़ी चुनौती

यूपी से लेकर राजस्थान तक ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां प्रेम विवाह कर अपने परिवार से रिश्ते तोड़ चुकी महिलाएं SIR प्रक्रिया में अटक गईं. गणना फॉर्म भरने के लिए पिता का नाम, पुरानी वोटर लिस्ट से पहचान और एपिक आइडी जैसे विवरण जरूरी होते हैं. घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने पहुंचे BLO के सामने कई महिलाएं रो पड़ीं, क्योंकि वे अब अपने माता-पिता से संपर्क ही नहीं कर पा रहीं. 

कानपुर, नोएडा से लेकर उदयपुर तक 

कानपुर की एक मुस्लिम युवती ने प्रेम विवाह के बाद परिवार से नाता तोड़ दिया था. अब SIR प्रक्रिया में उसे पिता की पहचान संबंधित दस्तावेज दिखाने हैं, लेकिन घरवालों से बात करने का रास्ता बंद है. ऐसे में उसका फॉर्म अस्थायी रूप से रोकना पड़ा. 

इसी तरह, नोएडा में नौकरी करने वाले युवक से विवाह कर कानपुर आई एक लड़की को अपने मायके से एक भी दस्तावेज नहीं मिल पाया. उसने पड़ोसियों की मदद से सूचनाएं जुटाने की कोशिश की. तो वहीं उदयपुर में वंदना नाम की महिला की स्थिति भी लगभग ऐसी ही रही. मायके ने दस्तावेज देने से मना कर दिया, जिससे पति समेत उसे स्वयं फार्म भरकर जमा करना पड़ा. 

पहचान और सहयोग की कमी से बढ़ रही मुश्किलें

प्रेम विवाह कर घर छोड़ने वाली महिलाएं अब पहचान प्रमाण और पारिवारिक सहयोग के अभाव में सरकारी अधिकारों तक पहुंच बनाने में कठिनाई झेल रही हैं. जिनके माता-पिता अब नहीं रहे या जो अलग रह रही हैं, उनकी स्थिति और भी कठिन है. न दस्तावेज, न बूथ की जानकारी, न पहचान संख्या है.

उदयपुर की जिला कलेक्टर मित मेहता ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती चरण में दस्तावेज देना अनिवार्य नहीं है. हर मतदाता महिला या पुरुष पहले गणना फॉर्म भरकर जमा करें, बाद में जरूरत होने पर प्रशासन आवश्यक मदद उपलब्ध कराएगा. 

जरूरत पड़ने पर लेनी होगी कानूनी 

वरिष्ठ अधिवक्ता रागिनी शर्मा का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को ऐसे माता-पिता की काउंसलिंग करनी चाहिए जो सहयोग नहीं कर रहे. महिलाएं खुद भी उपलब्ध दस्तावेज इकट्ठा कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता या FIR का रास्ता अपनाया जा सकता है.

बदायूं के एसडीएम मोहित कुमार ने बताया कि मतदाता की EPIC ID चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी देखी जा सकती है. यदि फिर भी जानकारी न मिले तो SIR प्रपत्र में दिए गए तीसरे विकल्प का चयन किया जा सकता है, जिससे आगे की प्रक्रिया में भाग लेना आसान हो जाएगा. 

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