बिहार में कांग्रेस-RJD की मुश्किलें बढ़ीं, बागी विधायकों पर एक्शन क्यों नहीं?

बिहार राज्यसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस और राजद में अंदरूनी घमासान तेज हो गया है. बागी विधायकों की गैरहाजिरी ने गठबंधन को नुकसान पहुंचाया, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई न होने से सियासी सवाल खड़े हो रहे हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव ने महागठबंधन (INDIA) के भीतर सियासी हलचल तेज कर दी है. एनडीए के सभी पांच सीटों पर जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस और राजद को करारी हार का सामना करना पड़ा है.

इस हार की बड़ी वजह विधायकों की गैरहाजिरी और संभावित अंदरूनी टूट को माना जा रहा है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बागी विधायकों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, क्या यह डर है या राजनीतिक मजबूरी?

कांग्रेस का रुख क्या है?

बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि राज्यसभा चुनाव में दल-बदल कानून लागू नहीं होता, फिर भी अनुपस्थित विधायकों को नोटिस भेजे गए हैं.

उन्होंने कहा "हम उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद पार्टी के शीर्ष नेता बैठक कर आगे की उचित कार्रवाई तय करेंगे."

कांग्रेस ने अपने तीन विधायकों सुरेंद्र मेहता, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

कार्रवाई में हिचक क्यों?

रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के भीतर यह चिंता है कि इन विधायकों पर कड़ी कार्रवाई से नुकसान हो सकता है. एक नेता ने कहा 
"क्या होगा अगर विधानसभा अध्यक्ष उन्हें एक अलग समूह के रूप में मान्यता दे दें?"

बताया जा रहा है कि ये तीनों विधायक विधानसभा में कांग्रेस की ताकत का बड़ा हिस्सा हैं, जिससे पार्टी सख्त कदम उठाने से बच रही है.

राजद भी असमंजस में

राजद भी अपने विधायक फैसल रहमान को लेकर इसी तरह की स्थिति में है. पार्टी ने अभी तक कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है.

पार्टी के एक नेता के मुताबिक, मामले पर अंतिम निर्णय तेजस्वी यादव के पटना लौटने के बाद लिया जाएगा.

विधायकों की सफाई

कांग्रेस के गैरहाजिर विधायकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पार्टी में नजरअंदाज किया गया और राजद ने एकतरफा फैसला लेकर उम्मीदवार तय कर दिया.

वहीं, राजद विधायक फैसल रहमान ने वोटिंग में शामिल न होने का कारण अपनी मां की गंभीर बीमारी बताया है.

एनडीए का विपक्ष पर तंज

भाजपा और जदयू ने इस मुद्दे पर विपक्ष को घेरा है. भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष पाठक ने कहा कि एनडीए की जीत उसकी एकजुटता का नतीजा है.

वहीं जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा -"शक्ति सिंह यादव जैसे राजद नेता विपक्षी एकता की बात करते थे. अब जब वे अपने ही विधायकों को एकजुट रखने में विफल रहे हैं, तो राजद और कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वे अपने विधायकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर एक मिसाल कायम करें."

चुनाव का गणित कैसे बिगड़ा?

16 मार्च को राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान हुआ था. 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए के पास 202 विधायक थे, जिससे उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी.

विपक्ष के पास 41 वोट थे, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त थे. लेकिन चार विधायकों की गैरहाजिरी के कारण विपक्ष यह आंकड़ा हासिल नहीं कर सका.

अंत में द्वितीय वरीयता के वोटों के आधार पर एनडीए उम्मीदवार शिवेश राम को जीत मिली.  

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो