BMC Election 2026: मुंबई को नहीं चाहिए स्पीडब्रेकर! गठबंधन वाली सरकार से मुंबई के विकास पर लग जाएगा ग्रहण
मुंबई के विकास में फडणवीस महायुति सरकार के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति मिली, जबकि एमवीए सरकार में कई योजनाएं धीमी रहीं. 2022 के बाद रुके प्रोजेक्ट्स फिर तेज हुए, जिससे विकास बनाम राजनीति की बहस उभरी.

मुंबईः पिछले एक दशक में मुंबई के विकास को लेकर राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर लगातार बहस होती रही है. अनुभव बताता है कि जब देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा और महायुति सरकार सत्ता में रही, तब मुंबई ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेज़ रफ्तार पकड़ी. इसके उलट, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनी महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार के दौरान कई अहम परियोजनाएं धीमी पड़ीं, जिससे शहर की विकास यात्रा बाधित हुई.
फडणवीस काल: योजनाओं से जमीन तक का सफर
2014 से 2019 के बीच देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल को मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का अहम दौर माना जाता है. इस दौरान वे योजनाएं जमीन पर उतरती दिखीं, जो वर्षों से फाइलों में अटकी हुई थीं. मुंबई मेट्रो नेटवर्क का विस्तार, कोस्टल रोड जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (आज का अटल सेतु) को इसी दौर में गति मिली. सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट थी. यातायात की समस्या कम करना और आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करना.
एमवीए सरकार: फैसलों पर सवाल
2019 में सत्ता परिवर्तन के बाद जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एमवीए सरकार बनी, तब कई बड़े प्रोजेक्ट्स की दिशा बदलती नजर आई. मेट्रो-3 के आरे कारशेड को लेकर लिया गया फैसला सबसे अधिक चर्चा में रहा. सरकार के इस कदम से न सिर्फ परियोजना में वर्षों की देरी हुई, बल्कि लागत भी कई हजार करोड़ रुपये बढ़ गई. आरोप लगे कि पूर्ववर्ती सरकार को श्रेय न मिले, इसी सोच के चलते फैसले बदले गए.
आम मुंबईकर की परेशानी
इन वर्षों में आम नागरिक को ट्रैफिक जाम, अधूरे रास्तों और धीमे कामों का सामना करना पड़ा. सड़कें खुदी रहीं, लेकिन समाधान दूर दिखा. कोविड-19 के कठिन दौर में भी जब लोगों को राहत की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब कई सरकारी फैसलों पर सवाल उठे. इस दौरान कुछ घोटालों के आरोप भी सामने आए, जिससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा.
2022 के बाद बदलाव की हवा
2022 में महायुति सरकार की वापसी के साथ ही मुंबई में एक बार फिर रुकी हुई परियोजनाओं ने रफ्तार पकड़ी. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में प्रशासनिक अड़चनें दूर की गईं. वर्षों से अधर में लटके प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम शुरू हुआ, जिससे मुंबईवासियों को राहत महसूस हुई.
अटल सेतु: विकास का प्रतीक
मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक, जिसे अब अटल सेतु कहा जाता है, महायुति सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है. देश का सबसे लंबा समुद्री पुल मुंबई और नवी मुंबई के बीच दूरी को काफी कम करता है और आर्थिक गतिविधियों को नया आयाम देता है.
कोस्टल रोड और मेट्रो विस्तार
कोस्टल रोड परियोजना ने दक्षिण मुंबई से वर्ली तक की यात्रा को आसान बनाया है. वहीं, मेट्रो नेटवर्क के नए रूट्स शहर को बेहतर कनेक्टिविटी दे रहे हैं. इसके साथ ही, बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी तेज़ी से काम आगे बढ़ रहा है, जिसे पहले अनावश्यक बताया जा रहा था.
आगे की राह: विकास या ठहराव?
2024 के विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर महायुति सरकार बनी है. जनता को उम्मीद है कि विकास की यह रफ्तार बनी रहेगी. लेकिन चिंता यह भी है कि यदि वही राजनीतिक सोच दोबारा हावी हुई, जो परियोजनाओं को रोकने में विश्वास रखती है, तो मुंबई की प्रगति फिर थम सकती है.
फैसला मुंबईकरों के हाथ में
मुंबई जैसे महानगर को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो फैसले लेने में देरी न करे और विकास को प्राथमिकता दे. अब सवाल यही है. क्या शहर को तेज़ विकास चाहिए या फिर बार-बार लगने वाले राजनीतिक ‘स्पीड ब्रेकर’? इसका जवाब आने वाला वक्त और मुंबईकरों की समझदारी तय करेगी.


