आसनसोल कोयला खदान हादसा: अवैध खनन में तीन मजदूरों की मौत, माफिया पर लगे गंभीर आरोप
आसनसोल में अवैध कोयला खनन के दौरान खदान ढहने से तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई. हादसे के बाद कोयला माफिया, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की मिलीभगत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

आसनसोल: पश्चिम बंगाल के आसनसोल से एक दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां मंगलवार सुबह कोयला खदान ढहने से अवैध खनन में जुटे कई मजदूर मलबे में दब गए. यह हादसा पश्चिम बर्दवान जिले के कुल्टी थाना क्षेत्र के बारिरा इलाके में हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया.
सरकारी स्वामित्व वाली भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की खदान में हुए इस हादसे ने एक बार फिर अवैध खनन और उससे जुड़ी सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया है. शुरुआत में पांच लोगों के फंसे होने की सूचना मिली थी, जिनमें से दो को बचा लिया गया, जबकि तीन मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है.
मलबे में दबे मजदूर
यह हादसा मंगलवार सुबह करीब 7:45 बजे हुआ, जब मजदूर अवैध तरीके से कोयला निकालने के लिए खदान में दाखिल हुए थे. अचानक सुरंग का एक हिस्सा धंस गया और मजदूर उसके नीचे दब गए. कुछ ही पलों में इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़ पड़े.
रेस्क्यू ऑपरेशन में निकाले गए तीन शव
घटना की सूचना मिलते ही बीसीसीएल के अधिकारी, पुलिस टीम और भारी मशीनरी के साथ बचाव अभियान शुरू किया गया. जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाया गया और फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की गई.
कुल्टी से भाजपा विधायक अजय पोद्दार ने बताया कि पहले पांच लोग फंसे थे, जिनमें से दो को जीवित निकाल लिया गया, जबकि बाद में तीन शव बरामद किए गए. दो घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
प्रशासनिक बयान
पश्चिम बर्दवान के जिला मजिस्ट्रेट पोन्नमबलम एस ने घटना पर कहा,"घटनास्थल की जांच चल रही है. जांच पूरी होने के बाद हम और अधिक जानकारी दे पाएंगे."
कोयला माफिया पर गंभीर आरोप
इस हादसे के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है. भाजपा विधायक अजय पोद्दार ने पुलिस, केंद्रीय बलों और कोयला माफियाओं पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा,"वे रैटहोल से कोयला निकाल रहे थे. यह एक साम्राज्य है. केंद्रीय बल, पुलिस और माफिया इसमें शामिल हैं. ग्रामीण ही मर रहे हैं. यह पूरे बंगाल में व्याप्त है."
स्थानीय लोगों में गुस्सा और मातम
हादसे के बाद कुल्टी और आसपास के गांवों में शोक का माहौल है. मृतकों के परिजनों का आरोप है कि खदान अधिकारियों और CISF को अवैध घुसपैठ की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
इलाके के कई गरीब परिवार रोज़ी-रोटी के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर कोयले के टुकड़े निकालने को मजबूर हैं, जिससे ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं.
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
यह घटना उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में 15 नवंबर 2025 को हुई खदान दुर्घटना की याद दिलाती है, जहां कई मजदूर फंस गए थे और सात लोगों की मौत हो गई थी. तब भी विशाल चट्टानों के कारण बचाव अभियान में भारी दिक्कतें आई थीं, जो खनन सुरक्षा की बड़ी चूक को उजागर करता है.


