राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कर्नाटक की सियासत गरम, DK शिवकुमार की पोस्ट से बढ़ी अटकलें
राहुल गांधी से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मुलाकात के बाद कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं. शिवकुमार की सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी, हालांकि दोनों नेताओं ने मतभेद से इनकार किया है.

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर तब और तेज हो गया, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हाल ही में एक संक्षिप्त मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद डीके शिवकुमार की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी.
शिवकुमार ने कन्नड़ भाषा में एक भावनात्मक संदेश साझा किया, जिसका हिंदी अर्थ है- "भले ही प्रयास असफल हो जाए, लेकिन प्रार्थना कभी असफल नहीं होती." उनके इस बयान को मुख्यमंत्री पद की कथित दौड़ से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ही सार्वजनिक मंचों से इस तरह के किसी भी सत्ता संघर्ष की बातों को खारिज करते रहे हैं.
हवाई अड्डे पर हुई संक्षिप्त बातचीत
राहुल गांधी तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के गुडालूर में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मंडकल्ली हवाई अड्डे पर रुके थे. इसी दौरान उनकी सिद्धारमैया और शिवकुमार से अलग-अलग और फिर एक साथ छोटी बातचीत हुई. यह मुलाकात पूरी तरह अनौपचारिक बताई जा रही है.
बता दें कि, राहुल गांधी मंगलवार को दो बार मैसूरु हवाई अड्डे से गुजरे. पहली बार गुडालूर जाते समय और दूसरी बार लौटते वक्त. दोनों ही मौकों पर राज्य के ये दोनों वरिष्ठ नेता हवाई अड्डे पर मौजूद थे.
बातचीत अब भी रहस्य
तीनों नेताओं के बीच किस विषय पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों, संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस को देखते हुए इन मुलाकातों को काफी अहम माना जा रहा है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान कांग्रेस के 'मनरेगा बचाओ' अभियान और इस कानून को पूरी तरह लागू कराने को लेकर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा हुई.
दिल्ली बुलाए जाने की संभावना
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों को बातचीत के लिए नई दिल्ली बुलाया जा सकता है. उन्होंने साफ कहा कि पार्टी जब उचित समझेगी, तब दोनों नेताओं को बुलाया जाएगा.
क्या है मामला?
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के 20 नवंबर को ढाई साल पूरे होने के बाद से मुख्यमंत्री पद पर बदलाव की चर्चाएं और तेज हो गई हैं. वर्ष 2023 में सरकार गठन के समय सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच कथित सत्ता-साझाकरण समझौते की बात सामने आई थी, जिसने इन अटकलों को और बल दिया.
वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हाल ही में देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ते हुए कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं. उन्होंने कई बार भरोसा जताया है कि वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे. हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान के हाथ में है.


