कांग्रेस महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र, प्रधानमंत्री को लेकर कही ये बड़ी बात
लोकसभा में हालिया हंगामे के बाद कांग्रेस की महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति किसी खतरे के आरोप को पूरी तरह खारिज किया है. उन्होंने इसे झूठा और मानहानिकारक बताया. स्पीकर ने दावा किया था कि कांग्रेस सांसदों द्वारा अप्रत्याशित घटना की आशंका से उन्होंने मोदी को सदन में न आने की सलाह दी, जिससे 22 साल बाद पीएम ने धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब नहीं दिया.

नई दिल्लीः लोकसभा में हाल ही में हुए हंगामे के बाद राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है. कांग्रेस की कई महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को एक मजबूत पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति किसी खतरे का आरोप पूरी तरह खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि यह दावा झूठा, बेबुनियाद और मानहानिकारक है.
यह सब तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ. प्रधानमंत्री को अपना निर्धारित जवाब देना था, लेकिन वे सदन में नहीं आए. यह 22 साल में पहली बार हुआ कि कोई प्रधानमंत्री ऐसी बहस में जवाब नहीं दे सका. बाद में बार-बार स्थगन के बीच ध्वनि मत से प्रस्ताव पास कर दिया गया.
स्पीकर ओम बिरला ने सदन में कहा था कि उन्हें विश्वसनीय सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास जमा होकर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते हैं. इसी वजह से उन्होंने मोदी को सदन में न आने की सलाह दी. उन्होंने विपक्ष के व्यवहार की भी आलोचना की.
डर का कार्य, साहस की कमी
कांग्रेस की महिला सांसदों ने अपने तीन पेज के पत्र में साफ कहा कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से था. उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री की सदन से अनुपस्थिति हमारे किसी खतरे की वजह से नहीं थी, बल्कि यह डर का कार्य था. उनमें विपक्ष का सामना करने का साहस नहीं था."
पत्र एस. जोतिमणि के नेतृत्व में लिखा गया और इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई अन्य महिला सांसदों के हस्ताक्षर हैं. उन्होंने स्पीकर पर भी सवाल उठाए कि सत्ताधारी दल द्वारा उनके कार्यालय पर दबाव डाला जा रहा है. वे चाहती हैं कि स्पीकर निष्पक्ष बने रहें. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी को बहस में बोलने का उचित मौका नहीं दिया गया, जो अभूतपूर्व और अस्वीकार्य है.
पूर्व सेना प्रमुख की किताब पर विवाद
विपक्ष का मुख्य विरोध इस बात पर था कि राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित संस्मरणों और भारत-चीन संबंधों पर बोलने की इजाजत दी जाए. स्पीकर ने सदन के नियमों का हवाला देकर मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस पर रोक लगा दी, जिसका सरकार के वरिष्ठ मंत्री भी समर्थन कर रहे थे. पत्र में हाल के निलंबनों का भी जिक्र है.
विपक्ष ने कहा कि आठ विपक्षी सांसदों को सजा दी गई, लेकिन भाजपा सांसद द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. यह चयनात्मक कार्रवाई बताई गई. प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री स्पीकर की आड़ में छिप रहे हैं और चर्चा से भाग रहे हैं. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सच्चाई से डरकर झूठ का सहारा लिया जा रहा है.


