SIR: सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी का तीखा सवाल, सिर्फ बंगाल को ही क्यों बनाया जा रहा निशाना?

सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी आपत्ति जताई. उन्होंने अदालत में कहा कि उन्हें और राज्य के लोगों को कहीं भी इंसाफ नहीं मिल रहा और SIR के जरिए वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश हो रही है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सियासी माहौल गरमा गया. इस अहम मामले में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अदालत में मौजूद रहीं और उन्होंने कोर्ट से बोलने की अनुमति मांगी.

कोर्ट के सामने अपनी बात रखते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और इस पूरी प्रक्रिया में राज्य के लोगों को इंसाफ नहीं मिल रहा. उन्होंने SIR को वोट जोड़ने की बजाय वोट काटने की कवायद करार दिया.

"मैं राज्य से हूं, क्या मैं बोल सकती हूं?"

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने कहा, "क्या मैं बोल सकती हूं? मैं राज्य से ताल्लुक रखती हूं. हमें कहीं भी इंसाफ नहीं मिल रहा है. हमने छह बार चुनाव आयोग को पूरी डिटेल्स के साथ चिट्ठी लिखी." उन्होंने भावुक लहजे में कहा, "मैं बहुत सामान्य परिवार से आती हूं. इंसाफ रो रहा है. मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं."

SIR का मकसद वोट डिलिट करना: ममता

ममता बनर्जी ने कोर्ट के सामने तर्क दिया कि SIR का असली उद्देश्य वोट जोड़ना नहीं बल्कि वोट डिलिट करना है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शादी के बाद लड़की के ससुराल जाने से भी डेटा मिसमैच हो सकता है, लेकिन उसे आधार बनाकर नाम हटाना गलत है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने ममता बनर्जी को यह कहते हुए टोका कि राज्य की ओर से श्याम दीवान और कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ वकील मौजूद हैं. कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि "हम पूरी कोशिश करेंगे कि कोई निर्दोष वोटर सूची से बाहर न हो. हमने पहले ही 10 दिन की डेडलाइन बढ़ाई है, ऐसे ही समय नहीं बढ़ाया जा सकता."

पश्चिम बंगाल को टारगेट किया जा रहा

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि अगर SIR जरूरी है तो असम और नॉर्थ ईस्ट में यह प्रक्रिया क्यों नहीं हो रही. उन्होंने कहा कि लोग फसलों में व्यस्त हैं, BLO पर दबाव है और आत्महत्या तक की घटनाएं सामने आ रही हैं.

ममता ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले सिर्फ पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया गया और दो महीने में वह काम कराने की कोशिश की जा रही है जिसमें आमतौर पर दो साल लगते हैं.

32 साल बाद कोर्ट में खुद दलील देने की संभावना

SIR के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है.
ममता बनर्जी के पास LLB की डिग्री है और यदि वह दलील देती हैं तो 32 साल बाद वह किसी मामले में कोर्ट के सामने बतौर वकील नजर आएंगी.

1994 में लड़ा था आखिरी केस

ममता बनर्जी आखिरी बार 10 फरवरी 1994 को पश्चिम बंगाल की एक जिला अदालत में वकील के रूप में पेश हुई थीं. उस केस में उन्होंने 33 आरोपियों को जमानत दिलाई थी. उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की है.

SIR पर पहले क्या कह चुका है सुप्रीम कोर्ट

19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी को असुविधा न हो. कोर्ट ने चुनाव आयोग को "लॉजिकल विसंगतियों" वाली वोटर लिस्ट ग्राम पंचायत और ब्लॉक कार्यालयों में सार्वजनिक करने को कहा था.
इन विसंगतियों में माता-पिता के नाम का बेमेल और उम्र का असामान्य अंतर शामिल है. राज्य में करीब 1.25 करोड़ वोटर्स इस श्रेणी में आते हैं.

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