दिल्ली में खुला मैनहोल फिर बना काल, बाइक सवार की मौत के कुछ दिनों बाद ही 32 वर्षीय व्यक्ति की मौत

रोहिणी में डीडीए की खाली जमीन पर खुले मैनहोल में गिरने से 32 वर्षीय मजदूर की मौत हो गई. घटना की सूचना देर से दी गई. राजधानी में पांच दिनों में यह दूसरी ऐसी दुर्घटना है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: राजधानी में एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही के चलते एक व्यक्ति को अपनी जान गवानी पड़ी. 5 फरवरी को कमल नाम के युवक की मोटरसाइकिल चलाते हुए गड्ढे में गिरने से हुई मौत की घटना के पांच दिनों के भीतर ही एक और व्यक्ति ऐसे ही दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया. रोहिणी इलाके में डीडीए की खाली पड़ी जमीन पर बने खुले मैनहोल में गिरने से 32 वर्षीय मजदूर की मौत हो गई. इस हादसे ने खुले गड्ढों और मैनहोल की समस्या को फिर से सामने ला दिया है.

दिल्ली पुलिस के अनुसार,  मंगलवार दोपहर 2:36 बजे एक पीसीआर कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति के सीवर में गिरने की आशंका जताई गई. जानकारी मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. मृतक के दोस्त अमीर हुसैन ने  पुलिस को कॉल करके हादसे की पूरी जानकारी दी थी. 

कैसे हुआ हादसा?

अमीर हुसैन ने बताया कि उनके दो दोस्त- समस्तीपुर निवासी बिरजू कुमार राय (32) और मधुबनी निवासी बुधन दास उर्फ सूरज (33) सोमवार रात साथ में थे. दोनों ने शराब पी रखी थी और शाम करीब 7:30 बजे पास की झुग्गी में लौट रहे थे. इसी दौरान बिरजू का संतुलन बिगड़ गया और वह खुले मैनहोल में गिर गया. पुलिस के अनुसार, उस समय बुधन दास भी नशे में था, इसलिए उसने तुरंत किसी को घटना की जानकारी नहीं दी. 

बुधन दास ने अगले दिन दोपहर होश आने के बाद अमीर हुसैन को पूरे मामले की जानकारी दी. इसके बाद पीसीआर को कॉल की गई. सूचना मिलते ही पुलिस ने डीडीए, दमकल विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को मौके पर बुलाया. संयुक्त प्रयास से बचाव अभियान चलाया गया. दमकल कर्मियों ने मैनहोल से युवक को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

स्थानीय लोगों के लगाए आरोप

घटना के बाद इलाके के लोगों में नाराजगी देखने को मिली. स्थानीय निवासी सुनील कुमार का कहना है कि व्यक्ति रात में ही गड्ढे में गिर गया था, लेकिन प्रशासन को इसकी सूचना देर से दी गई. एक अन्य निवासी तेजपाल यादव ने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल आपातकालीन कॉल मिलने के बाद सक्रिय हुए, जबकि युवक कई घंटों से गड्ढे में पड़ा था.

सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था

हाल ही में इसी तरह की दो अन्य घटनाओं ने दिल्ली-एनसीआर को झकझोर दिया था. 5 फरवरी को पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी में 25 वर्षीय कमल ध्यानी मोटरसाइकिल चलाते समय करीब 15 फुट गहरे गड्ढे में गिर गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई थी. वहीं, 16-17 जनवरी की रात ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहरा की कार पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी. बताया गया कि बचाव कार्य में देरी हुई और वह लगभग दो घंटे तक डूबी हुई कार के ऊपर खड़े रहे, लेकिन ठंड और पानी में लोहे की छड़ों के कारण टीम समय पर अंदर नहीं पहुंच सकी.

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