कठुआ में कथित धर्मांतरण प्रचारकों पर हमला, 8 पुलिसकर्मी निलंबित, एक आरोपी गिरफ्तार
कठुआ में धार्मिक प्रचारकों पर हुए हमले के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कठुआ ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में एक सब-इंस्पेक्टर और सात विशेष पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया.

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में धार्मिक प्रचारकों पर हुए हमले के बाद पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई की है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कठुआ ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में एक सब-इंस्पेक्टर और सात विशेष पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया है.
पुलिसकर्मियों पर क्यों हुई कार्रवाई?
यह कदम उस वायरल वीडियो के बाद उठाया गया, जिसमें पुलिसकर्मी घटना स्थल पर मौजूद तो दिखाई दिए, लेकिन उन्होंने हमलावरों को रोकने की कोई ठोस कोशिश नहीं की. यह घटना राजबाग थाना क्षेत्र के जुंठाना इलाके में घटी. जानकारी के अनुसार, कुछ धार्मिक प्रचारक एक वाहन में सवार होकर इलाके में धार्मिक संदेश देने जा रहे थे. इसी दौरान, स्थानीय युवकों के एक समूह ने उन पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाते हुए हमला कर दिया.
बताया जा रहा है कि हमलावर लाठियों से लैस थे और उन्होंने वाहन में तोड़फोड़ की. किसी तरह प्रचारक अपनी जान बचाकर वहां से भागने में सफल रहे. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि कुछ पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई. मामले के तूल पकड़ने पर पुलिस प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया.
एसएसपी कठुआ ने बताया कि पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है. मुख्य आरोपी रवींद्र सिंह थेला की पहचान हो चुकी है, जिसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. अब तक एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी की तलाश जारी है. एसएसपी ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी.
पुलिस ने इस घटना को सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश बताया है, अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है. साथ ही, एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
राज्य में धार्मिक सहिष्णुता और कानून-व्यवस्था की स्थिति
कठुआ की यह घटना राज्य में धार्मिक सहिष्णुता और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा, भड़काऊ बयानबाजी या अफवाह फैलाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दोषियों को जल्द ही न्याय के कटघरे में लाया जाएगा, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और समाज में शांति व भरोसा कायम रहे.


