रोबोट विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर बड़ा एक्शन, AI समिट से बाहर

दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान चीनी रोबोटिक डॉग के प्रदर्शन को लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवादों में घिर गई है. संबंधित अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए स्टॉल खाली करने के निर्देश दिए हैं. 

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान चीनी रोबोटिक डॉग के प्रदर्शन को लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवादों में घिर गई है. इस मामले में अब संबंधित अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसके स्टॉल को खाली करने के निर्देश दिए हैं. 

काउंटर हटाने के आदेश 

सूत्रों के अनुसार, समिट में प्रदर्शित रोबोट को लेकर उठे सवालों और आलोचनाओं के बाद यूनिवर्सिटी को कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया है और उसके स्टॉल से सभी उपकरण हटा दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि आईटी मंत्रालय, यानी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी को समिट में लगाए गए अपने काउंटर को हटाने और स्थान खाली करने का आदेश दिया. इसके बाद स्टॉल पर रखे गए उपकरण और संबंधित इनोवेशन डिवाइस को भी वहां से हटा लिया गया. हालांकि यूनिवर्सिटी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अलग दावा किया गया है. 

यूनिवर्सिटी की प्रतिनिधि डॉ. ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें अभी तक आधिकारिक तौर पर समिट छोड़ने के लिए कोई निर्देश नहीं मिला है और वे तय कार्यक्रम के अनुसार प्रदर्शनी में बने हुए हैं. इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की प्रतिभा और डेटा का उपयोग करने के बजाय यह समिट केवल एक प्रचार कार्यक्रम बनकर रह गया है, जहां विदेशी तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है.

प्रोफेसर नेहा सिंह ने क्या कहा?

यूनिवर्सिटी की ओर से सफाई देते हुए प्रोफेसर नेहा सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई भ्रामक जानकारियां फैल रही हैं, जिनमें सच्चाई पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी एक जिम्मेदार संस्थान है और उसने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोटिक डॉग का निर्माण उसी ने किया है.

ग्रेटर नोएडा स्थित यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह रोबोटिक डॉग चीनी कंपनी Unitree Robotics से खरीदा गया था और इसका उपयोग छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स की व्यावहारिक समझ देने के लिए किया जा रहा था. यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह डिवाइस छात्रों के लिए एक शैक्षणिक उपकरण है, जिससे वे नई तकनीकों को समझने और प्रयोग करने का अवसर पा रहे हैं.

यह विवाद तब बढ़ा जब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया गया कि यूनिवर्सिटी ने इस रोबोट को अपने इनोवेशन के रूप में प्रस्तुत किया. इसके बाद कई यूजर्स ने विदेशी तकनीक को भारतीय उत्पाद के रूप में पेश करने का आरोप लगाया. फिलहाल इस मामले में मंत्रालय और यूनिवर्सिटी के बीच स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है.

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