हरियाणा में 10 लाख छात्रों का डेटा लीक होने का दावा, मचा हड़कंप
शोधकर्ता के मुताबिक लीक हुए डेटा में छात्रों की 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, फोटो और अन्य निजी जानकारी शामिल हो सकती हैं।

चंडीगढ़: हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट से लाखों छात्रों का निजी डेटा लीक होने का दावा सामने आया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साइबर सुरक्षा शोधकर्ता '404 (@hacck3y)' ने एक पोस्ट में कहा कि वेबसाइट की तकनीकी खामी की वजह से 10 लाख से ज्यादा छात्रों की जानकारी सार्वजनिक हो गई है।
क्या-क्या लीक होने का दावा!
शोधकर्ता के मुताबिक लीक हुए डेटा में छात्रों की 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, फोटो और अन्य निजी जानकारी शामिल हो सकती हैं। उसने बताया कि इस खामी की जानकारी कई हफ्ते पहले ई-मेल के जरिए संबंधित अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद उसने मामला सार्वजनिक कर दिया। हालांकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एक्स पर साझा किए गए पोस्ट में हरियाणा उच्च शिक्षा विभाग के पोर्टल का हवाला दिया गया है। दावा है कि पोर्टल पर छात्रों के दस्तावेजों तक अनधिकृत पहुंच संभव हो गई थी।
बार-बार सामने आ रहे साइबर सुरक्षा के मामले
यह मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब देश में शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा प्रणालियों की साइबर सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में JEE एडवांस 2026 के रिजल्ट पोर्टल में भी क्लाउड स्टोरेज की गलत सेटिंग के कारण अभ्यर्थियों का डेटा सार्वजनिक हो गया था। उस मामले को संस्थान ने स्वीकार कर लिया था और सुधार के कदम उठाए थे।
हरियाणा का मामला भी अगर सही साबित होता है तो यह छात्रों की निजता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी लीक से पहचान चोरी, फर्जीवाड़ा और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ जाता है।
सरकार की ओर से अब तक कोई बयान नहीं
फिलहाल हरियाणा सरकार या उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से इस कथित डेटा लीक पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विभाग की चुप्पी के कारण छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार जांच के बाद क्या कदम उठाती है और डेटा की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम करती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों को अपने पोर्टल की सुरक्षा जांच नियमित रूप से करानी चाहिए। छोटी सी तकनीकी खामी भी लाखों छात्रों का डेटा खतरे में डाल सकती है।


