भारत सरकार की तिजोरी में कितना गोल्ड? जानें कीमत

वर्तमान में भारत के पास लगभग 880.18 मीट्रिक टन सोने का आधिकारिक भंडार है. अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव के आधार पर इसकी अनुमानित कीमत करीब 113.32 अरब डॉलर आंकी जाती है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, युद्ध की स्थितियां, आर्थिक प्रतिबंध और अनिश्चित वैश्विक हालात ने एक बार फिर देशों को अपनी वित्तीय रणनीतियों पर नए सिरे से सोचने को मजबूर कर दिया है. ऐसे माहौल में सोना फिर से एक मजबूत और भरोसेमंद आर्थिक सुरक्षा कवच के रूप में उभरा है. भारत भी इस वैश्विक ट्रेंड से अलग नहीं है. भारतीय रिजर्व बैंक के पास दुनिया के सबसे बड़े आधिकारिक स्वर्ण भंडारों में से एक मौजूद है. हालांकि, साल 2025 में आरबीआई की सोने की नई खरीद में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है.

भारत के पास कितना मीट्रिक टन सोने का आधिकारिक भंडार?

वर्तमान में भारत के पास लगभग 880.18 मीट्रिक टन सोने का आधिकारिक भंडार है. अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव के आधार पर इसकी अनुमानित कीमत करीब 113.32 अरब डॉलर आंकी जाती है. भारतीय मुद्रा में देखें तो यह मूल्य 9.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक बैठता है. यही वजह है कि सोना भारत के राष्ट्रीय खजाने की सबसे मूल्यवान संपत्तियों में शामिल है और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका है.

बीते वर्षों में भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है. फिलहाल, सोना देश के कुल फॉरेक्स रिजर्व का लगभग 16.02 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है. भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार करीब 687 अरब डॉलर के आसपास है, जिसमें सोने की यह भागीदारी पिछले लगभग 20 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है. इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करना और वैश्विक वित्तीय झटकों, प्रतिबंधों तथा मुद्रा अस्थिरता से देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना है.

सोने के भंडारण को लेकर भी भारत की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. हाल के वर्षों में आरबीआई ने अपने स्वर्ण भंडार को विदेश से वापस देश में लाने पर विशेष जोर दिया है. इस समय लगभग 510 से 575 मीट्रिक टन सोना भारत में ही सुरक्षित रखा गया है, जो मुख्य रूप से मुंबई और नागपुर स्थित आरबीआई की तिजोरियों में संरक्षित है. शेष लगभग 290 टन सोना अब भी बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के पास रखा गया है.

पिछले तीन वर्षों में भारत ने करीब 274 मीट्रिक टन सोना विदेश से वापस मंगाया है. इसके पीछे भू-राजनीतिक जोखिम, वैश्विक प्रतिबंधों की आशंका और राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्तियों पर सीधा नियंत्रण बनाए रखने की जरूरत प्रमुख कारण रहे हैं.

सोने की खरीदारी पर आरबीआई का रुख

हालांकि, सोने की खरीदारी के मोर्चे पर 2025 में आरबीआई का रुख काफी संयमित नजर आया. जहां साल 2024 में आरबीआई ने 72.6 टन सोना खरीदा था, वहीं 2025 में यह आंकड़ा घटकर केवल 4.02 टन रह गया. यह पिछले आठ वर्षों में सोने की सबसे कम खरीद मानी जा रही है, जो बदलती आर्थिक प्राथमिकताओं और वैश्विक परिस्थितियों को दर्शाती है.

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