एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच बढ़ रहीं दूरियां?, हालिया घटनाक्रमों के बाद उठे सवाल
एकनाथ शिंदे ठाणे जिले के बदलापुर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के अनावरण, ऐतिहासिक आगरा किले में मराठा राजा की जयंती समारोह और अम्बेगांव बुद्रुक में शिवसृष्टि थीम पार्क के दूसरे चरण के उद्घाटन में मौजूद नहीं थे. तीनों कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे.

महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. राज्य में नई सरकार बनने के बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे नाराज बताए जा रहे हैं. हाल के दिनों में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने देवेंद्र फडणवीस के तीन कार्यक्रमों से दूरी बना ली, इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि महाराष्ट्र में सीएम फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. आपको बता दें कि पिछले साल नवंबर में हुए चुनाव में महायुति गठबंधन को प्रचंड जीत मिली थी.
दरअसल, एकनाथ शिंदे ठाणे जिले के बदलापुर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के अनावरण, ऐतिहासिक आगरा किले में मराठा राजा की जयंती समारोह और अम्बेगांव बुद्रुक में शिवसृष्टि थीम पार्क के दूसरे चरण के उद्घाटन में मौजूद नहीं थे. तीनों कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे.
2022 में एकनाथ शिंदे ने की थी उद्धव से बगावत
पिछले साल नवंबर में महायुति गठबंधन, जिसमें भाजपा, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं. इस गठबंधन ने महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावो में 288 सीटों में से 230 सीटें जीतीं. 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से बगावत करके शिंदे ने बीजेपी से हाथ मिला लिया था, जिसके कारण पार्टी में शिवसेना दो गुटों में बंट गई. चुनाव आयोग और अदालत के फैसलों के बाद शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न दिया गया.
हालांकि, जब शिंदे को मुख्यमंत्री पद नहीं दिया गया तो शिवसेना कार्यकर्ताओं में असंतोष खुलकर सामने आ गया. इसके बाद उन्हें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में शामिल कर लिया गया. हाल ही में जब कुछ विधायकों को 'वाई' सुरक्षा कवर वापस ले लिया गया, तब तक यह दरार और भी बढ़ती गई. सूत्रों ने बताया कि सभी दलों के विधायकों के लिए सुरक्षा कवर घटा दिया गया है या वापस ले लिया गया है, लेकिन उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के विधायकों की संख्या ज्यादा है.
सिक्योरिटी रिव्यू के बाद सुरक्षा ली गई वापस
शिवसेना के बाद 44 विधायकों और 11 लोकसभा सांसदों को सिक्योरिटी कवर दिया गया था. लेकिन सूत्रों के अनुसार सुरक्षा आकलन के बाद जिन लोगों की सुरक्षा कवर वापस ले ली गई, उनमें शिंदे के करीबी भी शामिल हैं, जिनके पास कैबिनेट में कोई पद नहीं है.
एनसीपी-शिवसेना के बीच भी टकराव
शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अगुआई वाली एनसीपी के लिए भी तस्वीर अच्छी नहीं रही है. पार्टी के नेता सरकार की प्रमुख लड़की बहन योजना को लेकर आमने-सामने हैं, जिसे गठबंधन की जीत का श्रेय दिया जाता है, जबकि एकनाथ शिंदे की पार्टी ने एनसीपी की प्रचार सामग्री में योजना के नाम से पहले 'मुख्यमंत्री' शब्द गायब होने पर आपत्ति जताई थी, उनके सहयोगी ने विवाद को कमतर आंका.
बीजेपी ने मतभेदों को किया खारिज
एनसीपी नेता अदिति तटकरे और भाजपा के गिरीश महाजन की क्रमश: नासिक और रायगढ़ के संरक्षक मंत्री के रूप में नियुक्ति भी विवाद का विषय बन गई. शिंदे ने फडणवीस की अध्यक्षता में 2027 के नासिक कुंभ मेले की समीक्षा बैठक में भी भाग नहीं लिया. हालांकि, वरिष्ठ भाजपा नेता आशीष शेलार ने मतभेद की बातों को खारिज करते हुए इस बात पर जोर दिया कि कोई नाराजगी नहीं है और सरकार एकजुटता से चल रही है.


