जयशंकर का हमला: पाक सेना प्रमुख का 'चरम धार्मिक दृष्टिकोण' बना आतंक की वजह
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहलगाम हमले और सैन्य संघर्ष को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने यह भी कहा कि 12 मई को हुए युद्धविराम की मध्यस्थता अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नहीं की थी.

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 21 मई 2025 को डच प्रसारक एनओएस को दिए साक्षात्कार में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले को भारत-पाकिस्तान के बीच 100 घंटे तक चले सैन्य संघर्ष की शुरुआत बताया. उन्होंने कहा कि यह हमला पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के कट्टर धार्मिक दृष्टिकोण से प्रेरित था, जिन्होंने हमले से कुछ दिन पहले पाकिस्तान की "श्रेष्ठ" संस्कृति का उल्लेख किया था. जयशंकर ने इसे जानबूझकर धार्मिक तत्वों को शामिल करने की साजिश करार दिया.
ट्रम्प ने नहीं की युद्धविराम की मध्यस्थता
जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि 12 मई को हुए युद्धविराम की मध्यस्थता अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नहीं की थी, जैसा कि उन्होंने दावा किया था. उन्होंने कहा कि यह युद्धविराम भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे द्विपक्षीय समझौते का परिणाम था. भारत ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल संधि का निलंबन, पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारियों को निष्कासित करना और पाकिस्तान के नागरिकों के लिए जारी सभी वीजा रद्द करना शामिल है.
जयशंकर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान सरकार को यह दावा करना कि उसे आतंकवादी शिविरों के बारे में जानकारी नहीं है, विश्वास योग्य नहीं है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल अधिकांश कुख्यात आतंकवादी पाकिस्तान में ही हैं, जिनकी गतिविधियाँ और ठिकाने ज्ञात हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान सरकार और सेना आतंकवाद में संलिप्त हैं.
ऑपरेशन सिंदूर
पहल्गाम हमले के बाद भारत ने "ऑपरेशन सिंदूर" शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित नौ आतंकवादी शिविरों पर सटीक हमले किए गए. इस ऑपरेशन में 80 से अधिक आतंकवादी मारे गए. पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन अधिकांश को भारत के हवाई रक्षा नेटवर्क ने नष्ट कर दिया. इसके बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम की मांग की, जिसे भारत ने स्वीकार किया.
बदल चुकी है भारत की नीति
जयशंकर ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में कोई और आतंकवादी हमला होता है, तो भारत की सेना फिर से कार्रवाई करने के लिए तैयार है. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत की नीति अब बदल चुकी है और पाकिस्तान को अपने क्षेत्र में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करना होगा और कश्मीर में अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्र को वापस करना होगा, तभी कोई सार्थक बातचीत संभव है.
इस साक्षात्कार से यह स्पष्ट होता है कि भारत पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत से पहले आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता को प्राथमिकता दे रहा है. भारत की यह नीति क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्प को दर्शाती है.


