क्रिकेट में नो हैंडशेक लेकिन डिप्लोमेसी में यस? जयशंकर के पाकिस्तानी स्पीकर से हाथ मिलाने पर भड़के पाक एक्सपर्ट

भारत और पाक्सितान के बीच चल रहे तनाव के दौरान एस जयशंकर और अयाज सादिक का हाथ मिलाना एक बहुत ही बड़ा मुद्दा बन गया है. पाकिस्तान ने इसे डबल स्टैंडर्ड बताया.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के बीच एक छोटी सी मुलाकात ने पाकिस्तान में बड़ी बहस छेड़ दी है. ढाका में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तान नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक के बीच हाथ मिलाना पाकिस्तानी विशेषज्ञों को खटक गया. पाक एक्सपर्ट कमर चीमा ने इसे भारत का दोहरा रवैया बताया. 

ढाका में हुई मुलाकात

31 दिसंबर 2025 को ढाका में खालिदा जिया के राज्य अंतिम संस्कार में कई देशों के नेता शामिल हुए. इसी दौरान जयशंकर और अयाज सादिक की मुलाकात हुई. दोनों ने हाथ मिलाकर अभिवादन किया. बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं.

यह मुलाकात अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के उच्च स्तर पर पहला संपर्क थी. भारत ने इसे सामान्य शिष्टाचार बताया, जबकि पाकिस्तान ने इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया. 

क्रिकेट में क्यों नहीं हाथ मिलाते?

पाकिस्तानी एक्सपर्ट कमर चीमा ने सवाल उठाया कि जब भारतीय क्रिकेटर पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाते, तो जयशंकर ने स्पीकर से क्यों मिलाया हाथ? बता दें, सितंबर 2025 में एशिया कप के दौरान भारतीय टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से न हाथ मिलाया और न ही ट्रॉफी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ली. 

यह फैसला पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़े तनाव की वजह से था. मैच से पहले और बाद में हाथ मिलाने की परंपरा नहीं निभाई गई. भारतीय टीम ने इसे सरकार और बीसीसीआई के निर्देश से जोड़ा. 

कमर चीमा का आरोप

चीमा ने कहा कि क्रिकेट में हाथ न मिलाना पाकिस्तान को बड़ा संदेश देता है कि भारत कोई संबंध नहीं रखना चाहता. लेकिन जयशंकर का हाथ मिलाना सिर्फ बंद कमरों में होता है, जो भारतीय जनता को नहीं दिखता. 

उन्होंने पुराना उदाहरण दिया कि 2023 में गोवा में एससीओ मीटिंग के दौरान जयशंकर ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो से हाथ नहीं मिलाया, बल्कि नमस्ते की. उस समय आतंकवाद पर कड़ा संदेश देना था. चीमा का कहना है कि भारत जानबूझकर मैसेजिंग करता है जनता के सामने सख्ती, लेकिन कूटनीति में लचीलापन. 

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