कलवकुंतला कविता ने बनाई नई पार्टी, BRS से तोड़ा नाता

कलवकुंतला कविता ने ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ नाम से नई पार्टी बनाकर भारत राष्ट्र समिति से पूरी तरह अलग होने का ऐलान किया. इस कदम से के चंद्रशेखर राव की राजनीतिक विरासत और तेलंगाना की राजनीति में नया मोड़ आ गया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी कलवकुंतला कविता ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ की घोषणा कर दी है. इस कदम के साथ ही उन्होंने अपने पिता की पार्टी भारत राष्ट्र समिति से पूरी तरह दूरी बना ली है, जिससे राज्य की सियासत में नई हलचल शुरू हो गई है.

पार्टी का नाम, झंडा और एजेंडा सार्वजनिक

मेडचल जिले के मुनीराबाद में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में कविता ने अपनी नई पार्टी का नाम, झंडा और एजेंडा सार्वजनिक किया. इस दौरान भारी संख्या में उनके समर्थक मौजूद रहे और पूरे कार्यक्रम में उत्साह का माहौल देखने को मिला. बताया जा रहा है कि इस रैली में तेलंगाना के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 50 हजार लोगों ने भाग लिया. आयोजन के लिए लगभग 20 एकड़ में फैले मैदान का उपयोग किया गया, जिसे तेलंगाना आंदोलन के प्रमुख विचारक प्रोफेसर के. जयशंकर के नाम पर समर्पित किया गया था.

सूत्रों के मुताबिक, कविता अपनी नई पार्टी के लिए ‘TRS’ संक्षिप्त नाम को बनाए रखना चाहती थीं. यह वही नाम है, जो कभी तेलंगाना के अलग राज्य आंदोलन और क्षेत्रीय पहचान का प्रतीक माना जाता था. इस नाम के जरिए उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी राज्य के मूल मुद्दों और जनता की आकांक्षाओं पर केंद्रित रहेगी.

कविता का संबंध ‘तेलंगाना जागृति’ नामक एक सामाजिक संगठन से भी रहा है, जिसने अलग तेलंगाना राज्य की मांग के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी. पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि इसी संगठन को राजनीतिक पार्टी का रूप दिया जाएगा, लेकिन नई पार्टी के ऐलान के बाद इन सभी अटकलों पर विराम लग गया है.

‘TRS’ नाम का ऐतिहासिक महत्व

गौरतलब है कि ‘TRS’ नाम का ऐतिहासिक महत्व रहा है. यही वह नाम था, जिसके तहत कभी केसीआर ने राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई थी. हालांकि, बाद में उन्होंने पार्टी का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति कर दिया था. अब कविता ने उसी संक्षिप्त नाम को अपनाकर यह संदेश दिया है कि वह उस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहती हैं.

इससे पहले, पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते कविता को निलंबित किया गया था. इसके बाद उन्होंने 3 सितंबर 2025 को न केवल पार्टी की सदस्यता छोड़ी, बल्कि एमएलसी पद से भी इस्तीफा दे दिया था.

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