पार्टी बदली तो Gen Z ने छोड़ दिया साथ... 24 घंटे के भीतर राघव चड्ढा के 10 लाख फॉलोअर्स हुए कम
AAP छोड़कर BJP में शामिल होने के 24 घंटे के भीतर राघव चड्ढा के करीब 10 लाख फॉलोअर्स कम हो गए. उनके फॉलोअर्स की संख्या लगभग 14.6 मिलियन थी, जो शनिवार दोपहर तक घटकर 13.5 मिलियन रह गई.

राजधानी की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी (AAP) को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया. इस फैसले ने सियासी गलियारों में हलचल तो मचाई ही, साथ ही सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली. खासकर युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता में अचानक गिरावट ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी चर्चा में ला दिया है. राघव चड्ढा का पार्टी बदलना सिर्फ एक व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका असर आम आदमी पार्टी की स्थिति पर भी पड़ता दिख रहा है.
बताया जा रहा है कि उनके साथ AAP के छह राज्यसभा सांसद भी भाजपा में शामिल हो गए हैं. इससे अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी के सामने अपने नेताओं और सांसदों को एकजुट रखने की चुनौती बढ़ गई है. हालांकि, यह फैसला अचानक नहीं था. कुछ हफ्ते पहले उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया गया था, जिसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि वे जल्द ही कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं. लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद जिस तरह की प्रतिक्रिया सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया.
सोशल मीडिया पर घटते फॉलोअर्स ने बढ़ाई चिंता
आज के समय में सोशल मीडिया किसी भी नेता की लोकप्रियता को मापने का एक अहम जरिया बन गया है. ऐसे में राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में अचानक आई गिरावट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आंकड़ों के अनुसार, भाजपा में शामिल होने के बाद 24 घंटे के भीतर उनके करीब 10 लाख फॉलोअर्स कम हो गए.
शुक्रवार तक उनके फॉलोअर्स की संख्या लगभग 14.6 मिलियन थी, जो शनिवार दोपहर तक घटकर 13.5 मिलियन रह गई. इतनी तेज गिरावट इस बात का संकेत देती है कि उनके इस फैसले से एक बड़ा वर्ग असहज है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे युवाओं की बड़ी भूमिका है, जो सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.
Gen Z का विरोध और ‘अनफॉलो’ ट्रेंड
युवा वर्ग, खासकर Gen Z, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आ रहा है. सोशल मीडिया पर “unfollowRaghavChadha” नाम का हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जिसके जरिए लोग उन्हें अनफॉलो करने की अपील कर रहे हैं.
एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इंटरनेट की ताकत बहुत बड़ी है- यह किसी को रातोंरात मशहूर बना सकता है और उतनी ही जल्दी नीचे भी गिरा सकता है. राजनीतिक विश्लेषक दीक्षा कांडपाल ने भी बताया कि चड्ढा की पोस्ट्स पर बड़ी संख्या में ऐसे कमेंट्स आ रहे हैं, जिनमें उन्हें अनफॉलो करने की बात कही जा रही है. इससे साफ है कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक माहौल बन रहा है.
युवाओं के बीच क्यों लोकप्रिय थे चड्ढा?
राघव चड्ढा की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी थी, जो आम लोगों और खासकर युवाओं के मुद्दों को खुलकर उठाते थे. उन्होंने कई ऐसे विषयों पर बात की, जिन्हें आमतौर पर राजनीति में ज्यादा तवज्जो नहीं मिलती. इनमें पितृत्व अवकाश, ट्रैफिक जाम, मोबाइल डेटा की सीमा, एयरपोर्ट पर महंगे खाने और गिग वर्कर्स की समस्याएं शामिल थीं.
उन्होंने इन मुद्दों को सिर्फ उठाया ही नहीं, बल्कि उन्हें समझने के लिए खुद भी मैदान में उतरे. एक बार उन्होंने डिलीवरी पार्टनर बनकर काम किया, ताकि गिग वर्कर्स की असल समस्याओं को महसूस कर सकें. इस तरह के कदमों ने उन्हें युवाओं के बीच एक अलग पहचान दिलाई.
नीतिगत बदलाव और उनकी छवि
उनके प्रयासों का असर भी देखने को मिला. डिलीवरी कंपनियों के 10 मिनट में डिलीवरी के दबाव को लेकर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार ने इस समय सीमा को हटाने का फैसला किया. इससे चड्ढा की छवि एक ऐसे नेता के रूप में मजबूत हुई, जो जमीनी मुद्दों पर काम करता है. राज्यसभा में भी उन्होंने युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिससे पारंपरिक राजनीति और नई पीढ़ी के बीच की दूरी कम हुई. यही कारण था कि उन्हें एक अलग सोच वाले नेता के रूप में देखा जाता था.
निजी जीवन और सोशल मीडिया की भूमिका
राघव चड्ढा, जो अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा के पति हैं, सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं. वे अक्सर अपने फॉलोअर्स के साथ बातचीत करते थे और उनकी राय को महत्व देते थे. एक बार उन्होंने एक यूजर की पोस्ट भी साझा की थी, जिसमें सुझाव दिया गया था कि वे अपनी अलग “Gen Z पार्टी” बना सकते हैं. इस पर उन्होंने इसे दिलचस्प बताया था, जिससे इस तरह की चर्चाएं और बढ़ गई थीं. हालांकि, उन्होंने अपनी पार्टी बनाने के बजाय भाजपा में शामिल होने का रास्ता चुना, जो कई लोगों के लिए अप्रत्याशित था.
पुराने पोस्ट और नई विवाद की वजह
भाजपा में शामिल होने के बाद एक और विवाद सामने आया. कई सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि चड्ढा ने अपने अकाउंट से पुराने पोस्ट हटा दिए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की आलोचना की गई थी. AAP के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अब उनकी प्रोफाइल पर “मोदी” से जुड़ी सिर्फ दो पोस्ट बची हैं और दोनों ही प्रधानमंत्री की तारीफ में हैं. इस बदलाव ने भी लोगों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं.


