बी प्राक से दस करोड़ की धमकी नहीं, बिश्नोई गैंग ने सीधे भारतीय सिस्टम को ललकारा

पंजाबी सिंगर बी प्राक से मांगे गए दस करोड़ सिर्फ पैसा नहीं हैं। यह धमकी देश की कानून व्यवस्था, जेल सिस्टम और सेलेब्रिटी सुरक्षा पर सीधा सवाल बन गई है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

यह कहानी सिर्फ पैसों की नहीं है। दस करोड़ की मांग दिखती जरूर बड़ी है। लेकिन असली सवाल यह है कि धमकी किसे दी गई। एक मशहूर सिंगर को। ऐसा सिंगर जिसकी आवाज हर घर तक पहुंचती है। गैंग जानता था कि बी प्राक का नाम आते ही खबर हर स्क्रीन पर होगी। डर सिर्फ बी प्राक तक सीमित नहीं रहेगा। डर पूरे सिस्टम में फैलेगा। यही इस धमकी की असली ताकत है।

बी प्राक नहीं, बीच का आदमी क्यों चुना गया?

धमकी सीधे बी प्राक को नहीं दी गई। कॉल और मैसेज दिलनूर को भेजे गए। यह कोई संयोग नहीं है। यह रणनीति है। संदेश साफ है कि हम तुम्हारे आसपास हर किसी तक पहुंच सकते हैं। दोस्त। साथी। जानने वाले। यह मानसिक दबाव बनाने का तरीका है। गैंग यह दिखाना चाहता है कि कोई भी दूरी सुरक्षित नहीं है।

ऑडियो में सबसे खतरनाक लाइन कौन सी है?

ऑडियो में पैसों की बात चौंकाती जरूर है। लेकिन सबसे खतरनाक वाक्य वह है जिसमें कहा गया कि जिस देश में जाओगे वहां भी नुकसान हो सकता है। यह सीधी चुनौती है। यह कहना कि हम सीमाओं से बंधे नहीं हैं। यह सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं डराता। यह पुलिस और एजेंसियों को भी संदेश देता है।

जेल में बंद गैंग कैसे इतना बेखौफ है?

सबसे बड़ा सवाल यही है। अगर गैंग का सरगना जेल में है तो कॉल कैसे हो रहे हैं। विदेशी नंबर कैसे इस्तेमाल हो रहे हैं। ऑडियो मैसेज कैसे रिकॉर्ड होकर भेजे जा रहे हैं। यह मामला जेल सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या जेल सिर्फ नाम की सजा बनकर रह गई है। क्या अपराध अंदर से ही ऑपरेट हो रहे हैं।

पहले गोली, अब कॉल का मतलब क्या है?

नए साल में दिल्ली के अलग अलग इलाकों में फायरिंग हुई। पैटर्न वही रहा। पहले धमकी। फिर डर दिखाने की कार्रवाई। इस केस में गोली नहीं चली। लेकिन कॉल और ऑडियो ही काफी समझे गए। इसका मतलब साफ है। गैंग अब हिंसा से पहले मनोवैज्ञानिक दबाव को हथियार बना रहा है।

सेलेब्रिटी ही क्यों बनते हैं निशाना?

सेलेब्रिटी का नाम खबर बनता है। व्यापारी की धमकी लोकल रहती है। सिंगर की धमकी नेशनल हो जाती है। यही वजह है कि बी प्राक जैसे नाम चुने जाते हैं। मकसद सिर्फ पैसा नहीं। मकसद है अपनी ताकत का प्रचार। डर का ब्रांड बनाना। ताकि अगली कॉल से पहले ही सामने वाला टूट जाए।

यह मामला सिस्टम के लिए चेतावनी क्यों है?

यह केस सिर्फ एक एफआईआर नहीं है। यह चेतावनी है। अगर एक लोकप्रिय सिंगर खुद को असुरक्षित महसूस करे तो आम आदमी क्या सोचेगा। अगर जेल में बैठा गैंग खुलेआम धमकी दे तो भरोसा किस पर बचेगा। यह वक्त है जब सिस्टम को जवाब देना होगा। सिर्फ गिरफ्तारी से नहीं। बल्कि डर तोड़कर।

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