ठाकरे बंधुओं का गठबंधन टूटा! मनसे ने शिंदे गुट का थामा हाथ, कल्याण-डोंबिवली में बड़ा उलटफेर

उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बड़ा झटका लगा है. एमएनएस और यूबीटी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने के बावजूद, मनसे ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना का हाथ थाम लिया है.

Sonee Srivastav

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आया है, जहां महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपना समर्थन दे दिया है. यह फैसला उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि एमएनएस और यूबीटी ने चुनाव में साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी. अब एमएनएस की यह शिफ्ट से शिंदे गुट की स्थिति मजबूत हो गई है. 

MNS का अचानक यू-टर्न

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की एमएनएस ने गठबंधन किया था. दोनों पार्टियां एक साथ चुनाव मैदान में उतरीं, लेकिन नतीजे आने के बाद एमएनएस ने अपना रुख बदल लिया. एमएनएस ने कहा कि पार्टी प्रमुख राज ठाकरे ने स्थानीय नेताओं को क्षेत्र की सच्चाई के आधार पर फैसला लेने की आजादी दी थी. 

इस फैसले को इलाके के विकास के लिए जरूरी बताया गया है. एमएनएस के इस कदम से उद्धव ठाकरे के गुट को राजनीतिक नुकसान पहुंचा है, क्योंकि इससे उनका गठबंधन कमजोर पड़ गया.

चुनाव नतीजे और सीटों का गणित

केडीएमसी में कुल 122 सीटों के लिए चुनाव हुए. एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने सबसे ज्यादा 53 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 50 सीटें मिलीं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को सिर्फ 11 सीटों से संतोष करना पड़ा. एमएनएस ने 5 सीटें हासिल कीं, कांग्रेस को 2 और एनसीपी (एसपी) को 1 सीट मिली.

अब एमएनएस के समर्थन से शिंदे गुट के पास प्रभावी रूप से 58 पार्षदों का बल हो गया है. इससे महायुति गठबंधन (शिंदे शिवसेना और भाजपा) की पकड़ नगर निगम पर और मजबूत हो गई है, और सत्ता पर उनका कब्जा लगभग तय माना जा रहा है.

महापौर चुनाव की तैयारी

महाराष्ट्र सरकार ने कल्याण-डोंबिवली समेत 28 अन्य नगर निगमों में महापौर चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 22 जनवरी को महापौर पद के लिए आरक्षण तय करने वाली लॉटरी निकाली जाएगी. यह लॉटरी राज्य सचिवालय में होगी, जैसा कि शहरी विकास विभाग ने आदेश जारी कर बताया है. महाराष्ट्र में महापौर का चुनाव चुने हुए पार्षदों द्वारा होता है. पद को विभिन्न श्रेणियों में आरक्षित किया जाता है, जैसे सामान्य, महिलाएं, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी).

लॉटरी के बाद योग्य उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे. फिर नगर निगम की विशेष बैठक में वोटिंग होगी, जहां सदन की आधी से ज्यादा सीटों पर समर्थन पाने वाला उम्मीदवार जीतेगा. जहां बहुमत स्पष्ट होता है, वहां पार्टी आसानी से अपना महापौर चुन सकती है, लेकिन करीबी लड़ाई में गठबंधन निर्णायक साबित होते हैं.  केडीएमसी में शिंदे गुट की मजबूत स्थिति से उनका महापौर बनना आसान लग रहा है.
 

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