मणिपुर हिंसा: इंफाल से अगवा हुई कुकी महिला की इलाज के दौरान मौत, सामूहिक बलात्कार की पीड़ा ने छीनी जिंदगी

मई 2023 में इंफाल से अगवा की गई एक कुकी महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था. अब उसकी दर्दनाक मौत हो गई है. परिवार का कहना है कि यह उस भयानक त्रासदी की चोटों का यह नतीजा है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

मणिपुर में मई 2023 से जारी मैतेई-कुकी जातीय हिंसा के बीच एक कुकी जनजाति की महिला के साथ हुई अमानवीय दरिंदगी की कहानी ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है. इंफाल से अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनाई गई इस महिला की हाल ही में इलाज के दौरान मौत हो गई.

परिजनों का कहना है कि उसकी मौत उस भयावह घटना से मिले शारीरिक जख्मों और गहरे मानसिक आघात का नतीजा है. परिवार ने यह भी बताया कि जीते जी न्याय न मिल पाने का दर्द उसके भीतर लगातार बढ़ता रहा.

मई 2023 में इंफाल से अपहरण की घटना

हिंसा भड़कने के शुरुआती दिनों में, मई 2023 में इस 20 वर्षीय कुकी महिला का इंफाल से अपहरण कर लिया गया. एफआईआर में दर्ज बयान के अनुसार, चार हथियारबंद लोग जो काली शर्ट पहने हुए थे. उसे जबरन एक पहाड़ी इलाके में ले गए. वहां तीन आरोपियों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया.

कुकी संगठनों का आरोप है कि मीरा पाइबी के कुछ सदस्यों ने उसे मैतेई पुरुषों के हवाले किया. रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि अरामबाई तेंगगोल जैसे मैतेई समूह काली शर्ट पहनते हैं.

पीड़िता की आपबीती

जुलाई 2023 में मीडिया से बातचीत में पीड़िता ने उस रात की भयावहता बयां की थी. उसने कहा कि मुझे चार लोग एक सफेद बोलेरो में ले गए और जब वे मुझे ले जा रहे थे, तो ड्राइवर को छोड़कर उनमें से तीन ने मेरे साथ दुष्कर्म किया. फिर मुझे एक पहाड़ी पर ले जाया गया जहां उन्होंने मेरे साथ मारपीट की.

उसने आगे बताया कि वे मेरे साथ जो भी बुरी चीजे कर सकते थे उन्होंने कीं और पूरी रात मुझे कुछ भी खाने को नहीं दिया गया. उन्होंने पानी भी नहीं दिया. सुबह, किसी तरह, वॉशरूम जाने के बहाने मैंने आंखों पर बंधी पट्टी हटाई और आसपास देखने की कोशिश की कि क्या हो रहा है. उसके बाद मैंने पहाड़ी से नीचे भागने और बचने का फैसला किया.

कैसे जान बचाकर भागी?

गंभीर हालत में वह किसी तरह वहां से निकल पाई. सब्जियों के ढेर के नीचे छिपकर उसने एक ऑटो-रिक्शा चालक की मदद से कांगपोकपी तक पहुंच बनाई, जहां से उसे कोहिमा के अस्पताल में भर्ती कराया गया. राज्य में उस वक्त कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी थी. दो महीने बाद, 21 जुलाई को पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज हुई.

आईटीएलएफ का बयान और इलाज के दौरान मौत

चुराचांदपुर स्थित इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने बयान जारी कर कहा कि महिला को लैंगगोल ले जाकर बलात्कार किया गया और बिष्णुपुर में मरने के लिए छोड़ दिया गया.

आईटीएलएफ के अनुसार हालांकि वह बच गई, लेकिन उसे गंभीर शारीरिक चोटें, गहरा सदमा लगा और गर्भाशय से जुड़ी गंभीर समस्याएं हुईं. उसका गुवाहाटी में इलाज चल रहा था, लेकिन दुख की बात है कि 10 जनवरी, 2026 को चोटों के कारण उसकी मौत हो गई.

मां का दर्द

पीड़िता की मां ने मीडिया से बातचीत में बताया कि चोटों के चलते उसकी सांस लेने में दिक्कत बढ़ती चली गई थी. उन्होंने कहा कि इस भयानक क्रूरता का शिकार होने से पहले मेरी बेटी मिलनसार लड़की थी. उसे पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन वह इंफाल में हमारे एक रिश्तेदार के साथ एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी. उसके बहुत सारे दोस्त थे और वह हमेशा मुस्कुराती रहती थी. इस घटना के बाद उसकी मुस्कान चली गई.

हिंसा की आग में जलता मणिपुर

भूमि अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर भड़की मणिपुर हिंसा अब तक 260 से अधिक लोगों की जान ले चुकी है, जबकि करीब 50,000 लोग एक जगह से दूसरे जगह जा चुके हैं. आईटीएलएफ ने महिला की स्मृति में कैंडल मार्च निकालने का ऐलान किया है.

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