शादी सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं, एक सामाजिक कर्तव्य...तीन बच्चों के परिवार पर क्या बोले मोहन भागवत?
मोहन भागवत ने मुंबई में जनसंख्या असंतुलन पर तीन बच्चों के परिवार को आदर्श बताया, घुसपैठ और धर्मांतरण को खतरा करार दिया. जीडीपी से आगे गुणवत्ता पर जोर दिया. आरएसएस को पर्दे के पीछे नहीं, समाज सेवा पर केंद्रित बताया. वैश्विक हिंदू एकता और सामाजिक जागरूकता की अपील की.

मुंबईः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने जनसंख्या, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और आरएसएस की भूमिका जैसे विषयों पर अपनी राय रखी. भागवत ने जोर देकर कहा कि भारत की ताकत सिर्फ सरकार में नहीं, बल्कि समाज की जागरूकता और पारंपरिक मूल्यों में छिपी है.
तीन बच्चों का सिद्धांत
भगवत ने जनसंख्या पर चर्चा करते हुए पारंपरिक ज्ञान और चिकित्सा दृष्टिकोण का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि समाज की सेहत और संतुलन के लिए तीन बच्चों वाला परिवार आदर्श है. हालांकि, उन्होंने मौजूदा जनसंख्या दबाव को भी माना. विवाह को सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए उन्होंने जनसंख्या असंतुलन के तीन मुख्य कारण बताए: जन्म दर में कमी, धर्मांतरण और घुसपैठ. घुसपैठ पर उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे राज्य की 'आंखें और कान' बनें. संदिग्ध घुसपैठियों की जानकारी पुलिस को दें, ताकि सरकार की मदद हो. भागवत ने कहा कि समाज की देखभाल हर किसी की जिम्मेदारी है.
जीडीपी से आगे सोचें
अर्थव्यवस्था पर भागवत ने जीडीपी को एकमात्र पैमाना मानने की आलोचना की. उन्होंने कहा कि जीडीपी सिर्फ निर्यात-आयात दिखाती है, लेकिन पूरी आर्थिक तस्वीर नहीं. उत्पादन में मात्रा और गुणवत्ता का संतुलन जरूरी है. वास्तविक स्थिरता और मजबूत रुपया तभी आएगा, जब अर्थव्यवस्था के ठोस विकास के साथ अमूर्त पहलुओं पर ध्यान दिया जाए. भागवत ने सुझाव दिया कि आर्थिक नीतियां समाज की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनें, न कि सिर्फ आंकड़ों पर.
पर्दे के पीछे नहीं आरएसएस की भूमिका
भगवत ने केंद्र सरकार पर आरएसएस के प्रभाव की अफवाहों को खारिज किया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार वे लोग चलाते हैं जो वहां हैं, आरएसएस पर्दे के पीछे से हस्तक्षेप नहीं करता. हालांकि, राष्ट्रीय प्रगति के लिए संघ हमेशा सहयोग करने को तैयार है. भागवत ने जोर दिया कि आरएसएस का काम समाज को मजबूत करना है, राजनीति में नहीं पड़ना.
वैश्विक हिंदू एकता
दिल्ली के हालिया विस्फोट का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि सरकारी खुफिया जानकारी काफी नहीं. सामाजिक जागरूकता से ही असली नियंत्रण आता है. उन्होंने 'मुझे क्या' वाला रवैया छोड़ने की अपील की और आंतरिक-बाहरी खतरों से सतर्क रहने को कहा. बांग्लादेश में 12.5 करोड़ हिंदुओं की स्थिति पर उन्होंने एकता का आह्वान किया. भागवत ने कहा कि अगर विश्वभर के हिंदू एकजुट हों, तो वे बाहरी ताकतों पर निर्भर हुए बिना अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकते हैं.
समावेशी आरएसएस
भगवत ने आरएसएस को हर जाति के लिए खुला बताया, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति शामिल हैं. भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्र सेवा जारी रहेगी. भागवत के ये बयान राष्ट्रीय बहस को नई दिशा दे सकते हैं, जहां समाज और सरकार की भूमिका पर फोकस है.


