फर्जी नौकरी के चंगुल में फंसे 540 से अधिक भारतीयों को बचाया गया, इंडियन एयरफोर्स की फ्लाइट से 283 पहुंचे भारत

आजकल भारतीयों में विदेश में नौकरी करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है और इसी वजह से कई लोग फर्जी एजेंट्स के चक्कर में फंसकर अपना सबकुछ लुटाकर विदेश चले जाते हैं. लेकिन वहां जाकर जब सच्चाई का पता चलता है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक जाती है. ऐसा ही मामला अब म्यामांर से सामने आया है, जहां नौकरी रैकेट का शिकार हुए 540 भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक बचाया गया है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

म्यांमार में फर्जी नौकरी रैकेट का शिकार हुए 540 भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक बचाया गया, इनमें से 283 लोगों को भारतीय वायुसेना के विमान से भारत लाया जा रहा है. विदेश मंत्रालय ने बताया कि बचाव अभियान म्यांमार और थाईलैंड में भारतीय दूतावासों के बीच समन्वय से चलाया गया. यह मिशन स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर पूरा किया गया. बचाए गए लोगों को थाईलैंड के माई सोट से भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के विमान में सवार होकर भारत वापस लाया गया.

फर्जी जॉब्स की आड़ में चल रहा स्मगलिंग का धंधा

विदेश मंत्रालय ने रोजगार की आड़ में स्मगलिंग की बढ़ती ट्रेंड पर कहा, "इन लोगों को म्यांमार सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में नौकरी के फर्जी जॉब्स के माध्यम से बहकाया गया था." मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत विदेशों में ऐसी शोषणकारी स्थितियों में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षित रिहाई और वापसी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर और सक्रिय प्रयास कर रहा है.

सरकार ने कहा कि वह इस तरह के रैकेट के बारे में समय-समय पर जारी की गई सलाह और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से अपनी चेतावनी को दोहराना चाहती है. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "भारतीय नागरिकों को एक बार फिर सलाह दी जाती है कि वे विदेश में स्थित मिशनों के माध्यम से विदेशी नियोक्ताओं की साख की पुष्टि करें और नौकरी की पेशकश स्वीकार करने से पहले भर्ती एजेंटों और कंपनियों के पिछले रिकॉर्ड की जांच करें."

पिछले महीने 84 इंडोनेशियाई रिहा किए गए

पिछले महीने म्यांमार में घोटाले केंद्रों से 84 इंडोनेशियाई लोगों को रिहा किया गया. वे इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे. अधिकारियों के अनुसार, थाईलैंड, म्यांमार और चीन द्वारा घोटाले केंद्रों पर कार्रवाई के बाद म्यांमार के सीमावर्ती शहर म्यावाडी में बंदी बनाए गए 7,000 से अधिक लोगों में वे भी शामिल थे. 

इंडोनेशियाई नागरिकों को लेकर दो बसें गुरुवार को थाई सीमावर्ती शहर माई सोत पहुँचीं, जहाँ यात्रियों की स्वास्थ्य जाँच की गई और उनकी पहचान सत्यापित की गई. 84 इंडोनेशियाई नागरिकों, जिनमें 69 पुरुष और 15 महिलाएँ शामिल थीं, को 28 फ़रवरी को तीन वाणिज्यिक उड़ानों से स्वदेश लाया गया. 

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