लोकसभा में नया सियासी संग्राम, स्पीकर ओम बिरला पर अविश्वास प्रस्ताव से संसद में बड़ा टकराव शुरू
बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है। लोकसभा में सबसे बड़ा मुद्दा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव होगा। इससे संसद में नया सियासी टकराव देखने को मिल सकता है।

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू सोमवार से होने जा रहा है। लोकसभा की कार्यसूची में सबसे बड़ा मुद्दा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव है। संसद की वेबसाइट पर जारी एजेंडा में इसे मुख्य काम बताया गया है। इस प्रस्ताव पर सोमवार को चर्चा होगी। इसके बाद बहस का दौर शुरू होगा। माना जा रहा है कि सदन में इस मुद्दे पर तीखी राजनीति देखने को मिल सकती है। सरकार और विपक्ष आमने सामने खड़े होंगे।
क्या कांग्रेस सांसद लाए प्रस्ताव?
स्पीकर के खिलाफ यह प्रस्ताव कांग्रेस के तीन सांसदों ने दिया है। इनमें मोहम्मद जावेद, कोडिकुन्निल सुरेश और मल्लू रवि का नाम शामिल है। इन सांसदों ने आरोप लगाया है कि स्पीकर ने विपक्ष के साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया। प्रस्ताव में कहा गया है कि कई मौकों पर विपक्ष के नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया गया। इससे संसद के कामकाज पर असर पड़ा है। इसी आधार पर उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है।
क्या विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए?
प्रस्ताव में स्पीकर के कामकाज को लेकर कई आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि विपक्ष के सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया। आरोप यह भी है कि जब विपक्षी सांसद जनता के मुद्दे उठा रहे थे तब उन्हें रोका गया। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि कुछ महिला सांसदों पर अनुचित टिप्पणी की गई। विपक्ष का कहना है कि स्पीकर को सदन में पूरी तरह निष्पक्ष रहना चाहिए। लेकिन उनके फैसलों से यह संतुलन टूटता दिखा।
क्या बहस में बिरला शामिल होंगे?
सूत्रों के मुताबिक स्पीकर ओम बिरला इस बहस के दौरान स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। वह सदन में मंत्री की सीट पर बैठ सकते हैं। वहीं से पूरी कार्यवाही सुनेंगे। अगर प्रस्ताव पर मतदान होता है तो बिरला उसमें हिस्सा नहीं लेंगे। यह संसदीय परंपरा के मुताबिक होता है। इससे बहस के दौरान निष्पक्षता बनाए रखने की कोशिश की जाती है।
क्या नियम तय करते बहस समय?
लोकसभा के नियमों के अनुसार हर सांसद को बोलने के लिए सीमित समय दिया जाएगा। जो सांसद प्रस्ताव पर बोलेंगे उन्हें करीब पंद्रह मिनट मिलेंगे। उन्हें सिर्फ प्रस्ताव में लिखे आरोपों पर ही अपनी बात रखनी होगी। यानी बहस का दायरा तय रहेगा। इस वजह से चर्चा ज्यादा केंद्रित रहने की उम्मीद है।
क्या सभी विपक्षी दल साथ?
दिलचस्प बात यह है कि सभी विपक्षी दल इस प्रस्ताव के साथ नहीं दिख रहे। तृणमूल कांग्रेस के किसी सांसद ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। माना जा रहा है कि टीएमसी इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगी। यानी विपक्ष के भीतर भी इस मुद्दे पर पूरी एकजुटता नहीं है। इससे संसद में राजनीतिक समीकरण दिलचस्प हो सकते हैं।
क्या राहुल गांधी बहस में बोलेंगे?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। अभी यह साफ नहीं है कि वह बहस में हिस्सा लेंगे या नहीं। अगर वह बोलते हैं तो बहस का राजनीतिक असर और बढ़ सकता है। फिलहाल सोमवार की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं। क्योंकि इसी दिन तय होगा कि यह सियासी लड़ाई कितनी आगे जाती है।


