ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने खोल मोर्चा, अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी हुई तेज, संसद में हंगामा चरम पर

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान बड़ा ड्रामा हुआ. विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का मौका ही नहीं मिला. इस बात से खफा विपक्ष ने अब स्पीकर के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोल दिया है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. लोकसभा में जारी हंगामे की वजह से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा नहीं हो सकी, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बिना ही इसे पारित करना पड़ा. अब विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है.

विपक्षी दलों के सूत्रों के अनुसार, लगभग सभी विपक्षी पार्टियां स्पीकर के खिलाफ इस प्रस्ताव पर सहमत हैं और जल्द ही लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपा जाएगा. हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी हस्ताक्षर होने बाकी हैं. अगर विपक्ष स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाता है, तो यह ओम बिरला के दूसरे कार्यकाल में उनके कामकाज पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा.

स्पीकर पर विपक्ष की नाराजगी के कारण

सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष स्पीकर ओम बिरला से नाराज चल रहा है. स्पीकर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा शुरू कराई थी. केंद्र सरकार की ओर से मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने प्रस्ताव पेश किया, जिसका समर्थन बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने किया और विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. विपक्ष की ओर से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले वक्ता थे.राहुल गांधी ने अपनी बारी में डोकलाम और चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाया. उन्होंने जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब का जिक्र करते हुए चीनी घुसपैठ पर बात की. इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया. स्पीकर ने कई बार टोका और बाद में पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने राहुल गांधी को बोलने से रोकते हुए अगले वक्ता की ओर रुख कर लिया.


विपक्ष की आवाज को दबाने के आरोप

विपक्षी सांसदों ने राहुल गांधी के समर्थन में बोलने से इनकार कर दिया था. नतीजतन, धन्यवाद प्रस्ताव बिना चर्चा और बिना जवाब के ही पारित हो गया. विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने का मौका नहीं दिया गया. विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि सदन में नेता प्रतिपक्ष विपक्ष की आवाज होता है. विपक्ष के नेता को नहीं बोलने दिया जाना विपक्ष की आवाज दबाने जैसा है.

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