कर्नाटक में फिर सियासी हलचल तेज, CM बदलने की अटकलों के बीच दिल्ली पहुंचे सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं, जहां सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं.

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इसी महीने तीसरी बार दिल्ली पहुंचे हैं. ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पार्टी के भीतर 'रोटेशन फॉर्मूले' की चर्चा फिर जोर पकड़ रही है और ये सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या सिद्धारमैया अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या फिर वे डीके शिवकुमार के लिए रास्ता साफ करेंगे.
सिद्धारमैया जल्द ही कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. वे पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स के 2,792 दिनों के रिकॉर्ड के बेहद करीब हैं. वहीं, कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी और दोनों खेमों के बीच अंदरूनी खींचतान से सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है.
राहुल गांधी से मुलाकात की संभावनाएं
ये दौरा कांग्रेस पार्टी की पिछड़ा वर्ग इकाई द्वारा तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित प्रतिनिधित्व और न्याय सम्मेलन के अवसर पर हो रहा है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोनों नेता इस दौरान राहुल गांधी से मुलाकात की कोशिश कर सकते हैं. ये बैठक जुलाई में तय थी लेकिन उस समय नहीं हो सकी थी.
नेतृत्व परिवर्तन पर कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी
हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से दोनों गुटों से संयम बरतने की अपील कर चुका है, लेकिन पर्दे के पीछे राजनीतिक जोड़तोड़ और रणनीति बनना जारी है. फिलहाल कांग्रेस हाईकमान ने इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है और माना जा रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव तक यथास्थिति बनाए रखी जाएगी.
सिद्धारमैया का कार्यकाल और OBC समीकरण
सिद्धारमैया इस समय देश के इकलौते ओबीसी मुख्यमंत्री हैं. ऐसे में कांग्रेस के लिए यह मुद्दा संवेदनशील है, खासकर उस समय जब राहुल गांधी लगातार जातीय जनगणना और आरक्षण के मुद्दे पर मुखर रहे हैं. यदि सिद्धारमैया को हटाया गया, तो इसका असर बिहार समेत अन्य राज्यों के ओबीसी वोट बैंक पर पड़ सकता है.
संगठनात्मक नियुक्तियों पर बनी सहमति
दिल्ली दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने मिलकर 20 नगर पालिका अध्यक्षों की नियुक्तियों को अंतिम रूप दिया है. इस सूची की घोषणा उनके बेंगलुरु लौटते ही हो सकती है. इनमें कुछ ऐसे वरिष्ठ विधायक भी शामिल हैं, जो मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज चल रहे थे. इसके अलावा, चार एमएलसी सीटों के लिए भी उम्मीदवारों पर चर्चा चल रही है.
सिद्धारमैया खेमे ने ये स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री अपना पूरा कार्यकाल पूरा करने के इरादे से ही काम कर रहे हैं. वहीं डीके शिवकुमार गुट इस मुद्दे पर अभी चुप्पी साधे हुए है.


