सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण को ढंग से नहीं पढ़ा या फिर...चिदंबरम ने बजट 2026 को लेकर वित्त मंत्री पर साधा निशाना
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने आज यानी रविवार को नौवां बजट पेश कर दिया. जिसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से बजट की तारीफ की गई. लेकिन, विपक्षी दलों ने इसकी कड़ी निंदा की. पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री के भाषण सुनने के बाद ऐसा लगता है कि जैसे उन्होंने आर्थिक सर्वे को ध्यान से पढ़ा ही नहीं है या पढ़ा भी है तो उसे पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है.

नई दिल्ली : पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर तीखा निशाना साधा है. चिदंबरम ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वित्त मंत्री ने या तो आर्थिक सर्वेक्षण को गहराई से पढ़ा नहीं है या फिर उन्होंने जानबूझकर इसके तथ्यों को दरकिनार करने का विकल्प चुना है. उनके अनुसार, बजट केवल वार्षिक राजस्व और व्यय का विवरण नहीं होता, बल्कि उसे देश की आर्थिक चुनौतियों के प्रति एक स्पष्ट विजन पेश करना चाहिए.
आपको बता दें कि चिदंबरम ने यह भी आरोप लगाया कि इस बजट में दूरदर्शिता की भारी कमी है, जो अर्थशास्त्र के किसी भी छात्र को स्तब्ध कर सकती है. उनका मानना है कि सरकार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में उठाई गई प्रमुख चुनौतियों पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण पेश करने में पूरी तरह विफल रही है.
चिदंबरम ने मीडिया से बातचीत के दौरान उन गंभीर आर्थिक मुद्दों की एक लंबी सूची प्रस्तुत की, जिन्हें बजट भाषण में कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया गया. उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, कम होता सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जो लगभग 30 प्रतिशत पर है), और निजी क्षेत्र के निवेशकों के बीच व्याप्त हिचकिचाहट जैसे वैश्विक और घरेलू मुद्दों पर चिंता व्यक्त की.
वित्त मंत्री के चुप्पी को निराशजनक बताया
इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनिश्चितता, बढ़ता राजकोषीय घाटा, लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का बंद होना और युवाओं में व्याप्त बेरोजगारी जैसे संवेदनशील विषयों पर वित्त मंत्री की चुप्पी को निराशाजनक बताया. उन्होंने बढ़ते शहरीकरण और नगरपालिकाओं व नगर निगमों में बिगड़ते बुनियादी ढांचे को भी एक बड़ी चुनौती बताया जिस पर बजट मौन रहा.
वित्त मंत्री केवल नई योजनाओं को बढ़ाने में व्यस्त
बजट की आलोचना करते हुए चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री केवल नई योजनाओं, मिशनों, संस्थानों और समितियों की संख्या बढ़ाने में व्यस्त हैं, बिना यह सोचे कि उनकी जमीनी प्रभावशीलता क्या होगी. उन्होंने ऐसी कम से कम 24 घोषणाओं की गिनती की और संदेह जताया कि इनमें से कितनी अगले वर्ष तक अस्तित्व में रहेंगी. इसके अलावा, उन्होंने क्षेत्रीय भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए बजट में तमिलनाडु की उपेक्षा किए जाने की भी कड़ी निंदा की.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार तमिलनाडु के हितों को खारिज कर रही है और यह राज्य के विकास के प्रति भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है. यह आलोचना विपक्ष के उस व्यापक रुख का हिस्सा है जिसमें बजट को 'खोखला' और वास्तविकता से परे बताया जा रहा है.


