आज 4 घंटे के लिए बंद रहेंगे पुरी जगन्नाथ मंदिर के कपाट, जानिए समय

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने जानकारी दी है कि चतुर्द विग्रह की पवित्र बानाकलागी नीति के कारण मंदिर के कपाट लगभग चार घंटे के लिए बंद रहेंगे.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पुरी के विश्वविख्यात श्री जगन्नाथ मंदिर में बुधवार को एक विशेष और पारंपरिक अनुष्ठान के चलते श्रद्धालुओं के लिए कुछ समय तक दर्शन की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी. श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने जानकारी दी है कि चतुर्द विग्रह की पवित्र बानाकलागी नीति (श्रीमुख श्रृंगार अनुष्ठान) के कारण मंदिर के कपाट लगभग चार घंटे के लिए बंद रहेंगे.

चार घंटे तक प्रवेश द्वार रहेंगे बंद 

मंदिर प्रशासन के अनुसार यह महत्वपूर्ण अनुष्ठान फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि यानी बुधवार 11 फरवरी 2026 को संपन्न किया जाएगा. निर्धारित कार्यक्रम के तहत दूसरे भोगमंडप में भोग अर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम करीब छह बजे से रात दस बजे तक मंदिर के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे. इस दौरान आम श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ के दर्शन की अनुमति नहीं होगी.

बानाकलागी नीति श्री जगन्नाथ मंदिर की अत्यंत प्राचीन और गोपनीय परंपरा का हिस्सा है. इस अनुष्ठान को केवल दत्ता महापात्र सेवक ही रत्न बेदी पर संपन्न करते हैं. परंपरा के अनुसार इसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन के पवित्र श्रीमुख का विशेष श्रृंगार किया जाता है. यह श्रृंगार पूरी तरह प्राकृतिक रंगों और सुगंधित द्रव्यों से किया जाता है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है.

श्रीमुख श्रृंगार में कौन से रंग का होता है उपयोग?

श्रीमुख श्रृंगार में हिंगुला, हरिताला, शंख से प्राप्त सफेद रंग और काले रंग का उपयोग किया जाता है. इन रंगों को कस्तूरी, केसर और अन्य सुगंधित तत्वों के साथ पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है. रंगों को अर्पित करने से पहले कपूर और कस्तूरी के साथ विधिवत संस्कार किया जाता है, ताकि यह अनुष्ठान पूरी श्रद्धा और नियमों के अनुसार संपन्न हो सके.

अनुष्ठान की समाप्ति के बाद महाप्रभु का महास्नान कराया जाता है. इसके पश्चात मंदिर के द्वार पुनः खोल दिए जाते हैं और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सामान्य रूप से शुरू हो जाते हैं.

एसजेटीए के अधिकारियों ने क्या कहा?

एसजेटीए के अधिकारियों ने बताया कि बानाकलागी नीति आमतौर पर महीने में दो बार आयोजित की जाती है और यह अनुष्ठान केवल बुधवार के दिन ही किया जाता है. इस दौरान मंदिर पूरी तरह बंद रहता है और दर्शन सख्ती से निषिद्ध होते हैं.

मंदिर प्रशासन ने बुधवार को पुरी आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस अस्थायी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं और मंदिर की परंपराओं का सम्मान करते हुए प्रशासन को सहयोग प्रदान करें.

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