सऊदी-कतर से फिलिस्तीन तक, सब राजधानी में... पाकिस्तान की उड़ी नींद, भारत की मास्टरस्ट्रोक डिप्लोमेसी ने मचाया धमाल

नई दिल्ली के भव्य भारत मंडपम में इंडिया-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू हो गई है. 22 अरब देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए हैं. भारत और संयुक्त अरब अमीरात इस महत्वपूर्ण मंच के सह-अध्यक्ष हैं. व्यापार, निवेश, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे रणनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा होगी. यह फोरम भारत की 'वेस्ट एशिया नीति' को नई दिशा देने वाला गेम-चेंजर साबित हो सकता है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आज भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन हो रहा है. यह अवसर इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि एक दशक के लंबे अंतराल के बाद भारत और अरब लीग के देश इस उच्च स्तरीय मंच पर एकत्रित हो रहे हैं. पहली बैठक 2016 में बहरीन में हुई थी, जबकि अब भारत पहली बार इसकी मेजबानी कर रहा है, जो दोनों पक्षों के बीच मजबूत रिश्तों की नई शुरुआत का संकेत देता है. 

इस बैठक में पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के 22 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. भारत और संयुक्त अरब अमीरात  संयुक्त रूप से इसकी सह-अध्यक्षता कर रहे हैं. बैठक से पहले सभी विदेशी अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. शनिवार शाम 4 बजे शुरू होने वाली इस सभा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रणनीतिक सहयोग को मजबूत बनाना है. 

10 वर्ष बाद भारत में पहली मेजबानी

यह 'इंडिया-अरब एफएमएम' भारत और अरब राष्ट्रों के बीच सबसे ऊंचे स्तर का संस्थागत प्लेटफॉर्म है. रोचक तथ्य यह है कि 2016 में बहरीन में पहली बैठक के बाद अब एक दशक के बाद दिल्ली में दूसरी बैठक का आयोजन हो रहा है. भारत और अरब संवाद को 2002 में एमओयू के माध्यम से औपचारिक स्वरूप मिला था. 2008 में 'अरब-इंडिया को-ऑपरेशन फोरम' की स्थापना हुई थी. भारत अरब लीग का 'ऑब्जर्वर' भी है, जिसमें 22 सदस्य देश शामिल हैं. 

6 विदेश मंत्री समेत प्रमुख अधिकारी उपस्थित

इस सम्मेलन में अरब जगत के लगभग सभी प्रमुख देश अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं. फिलिस्तीन, कोमोरोस, सूडान, सोमालिया, लीबिया और ओमान सहित 6 देशों के विदेश मंत्री व्यक्तिगत रूप से बैठक में शामिल हो रहे हैं. वहीं, मिस्र, यमन, कतर, यूएई और सऊदी अरब से उप-विदेश मंत्री या राज्य मंत्री स्तर के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. जिबूती, अल्जीरिया, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, लेबनान, सीरिया, मॉरिटानिया और इराक से वरिष्ठ अधिकारी आधिकारिक तौर पर भागीदारी करेंगे.अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और सुरक्षा पर केंद्रित चर्चा पहली बैठक में सहयोग के पांच प्रमुख क्षेत्र निर्धारित किए गए थे.

अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति. आज की बैठक में मौजूदा सहयोग को और सशक्त बनाने पर जोर रहेगा. भारत और अरब देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहराई प्रदान करने के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत विमर्श की अपेक्षा है. यह प्लेटफॉर्म भारत की 'वेस्ट एशिया पॉलिसी' के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है.

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