कांगो में माइनिंग के दौरान हुआ हादसा, कोल्टन खदान धंसने से 200 से ज्यादा लोगों की मौत
पूर्वी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के रुबाया इलाके में भीषण भूस्खलन से 200 से ज्यादा लोगों की जान जाने की पुष्टि की गई है.

पूर्वी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के रुबाया इलाके में स्थित कोल्टन खदान में हुए भीषण भूस्खलन ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है. इस भयावह दुर्घटना में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जान जाने की पुष्टि की गई है. स्थानीय प्रशासन का कहना है कि हादसे के वक्त खदान के भीतर सैकड़ों लोग काम कर रहे थे, जिससे नुकसान का दायरा बेहद बड़ा हो गया.
घायलों का इलाज जारी
प्रांत में सक्रिय विद्रोही समूह द्वारा नियुक्त गवर्नर के प्रवक्ता लुबुम्बा काम्बेरे मुइसा ने बताया कि जिस समय भूस्खलन हुआ, उस दौरान खदान में केवल मजदूर ही नहीं बल्कि कई बच्चे और आसपास के अस्थायी बाजार में काम करने वाली महिलाएं भी मौजूद थीं. मलबे में दबे कुछ लोगों को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया है. फिलहाल लगभग 20 घायलों का इलाज नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में जारी है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है.
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक शुक्रवार शाम तक मृतकों की संख्या कम से कम 227 तक पहुंच चुकी थी, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है. राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है. हालांकि, भारी बारिश और जमीन की अस्थिर स्थिति के चलते बचाव दलों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. कई इलाकों में मलबा इतना गहरा है कि अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है.
प्रशासन ने हादसे के पीछे का क्या कारण बताया?
प्रशासन ने इस हादसे के पीछे बारिश के मौसम में कमजोर हो चुकी जमीन को मुख्य कारण बताया है. स्थानीय निवासी वर्षों से बेहद जोखिम भरे हालात में इस खदान में काम करते आ रहे हैं. यहां मजदूर बिना किसी आधुनिक उपकरण या सुरक्षा इंतजाम के हाथों से खुदाई करते हैं और अपनी जान जोखिम में डालकर रोज़ कुछ डॉलर कमाने को मजबूर हैं. अवैध खनन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस क्षेत्र की पुरानी समस्या रही है.
रुबाया की यह खदान वैश्विक स्तर पर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. यहां से दुनिया के लगभग 15 प्रतिशत कोल्टन का उत्पादन होता है. कोल्टन से टैंटलम नामक धातु प्राप्त की जाती है, जिसका इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, एयरोस्पेस तकनीक और गैस टर्बाइन जैसे आधुनिक उपकरणों में किया जाता है.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 से यह खदान AFC/M23 विद्रोही समूह के नियंत्रण में है. यूएन का आरोप है कि विद्रोही इस खदान से मिलने वाली आय का इस्तेमाल अपने सशस्त्र अभियानों को चलाने में कर रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पड़ोसी देश रवांडा से उन्हें समर्थन मिल रहा है. हालांकि, रवांडा सरकार इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर चुकी है.


