ईरान के परमाणु ठिकानो पर दिखी हलचल, सैटेलाइट तस्वीरें देख अमेरिका-इजरायल की बढ़ी टेंशन
ताजा सैटेलाइट इमेजरी से खुलासा हुआ है कि ईरान ने अपने दो प्रमुख परमाणु केंद्रों- इस्फहान और नतांज में क्षतिग्रस्त ठिकानो पर नई हलचल देखी जा रही है जिसे पिछले साल इजरायल और अमेरिका के भीषण हवाई हमलों से तबाह कर दिया गया था। क्या ईरान कुछ बड़ा करने की रणनीति बना रहा है?

नई दिल्ली: पिछले साल इजरायल और अमेरिका के भीषण हवाई हमलों से तबाह हुए ईरान के परमाणु ठिकानों पर अब नई हलचल मची हुई है. ताजा सैटेलाइट इमेजरी से खुलासा हुआ है कि ईरान ने अपने दो प्रमुख परमाणु केंद्रों- इस्फहान और नतांज में क्षतिग्रस्त इमारतों के ऊपर नई छतें और कवर तैयार कर लिए हैं. प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा जारी इन तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आशंका बढ़ा दी है कि तेहरान हमलों से बचे संवेदनशील संसाधनों को छिपाने या पुनः प्राप्त करने की जुगत में लगा है.
जून में इजरायल और ईरान के बीच चले 12 दिवसीय युद्ध के बाद यह पहला बड़ा निर्माण कार्य है जो किसी बमबारी प्रभावित परमाणु स्थल पर नजर आया है. इन विकासों से अमेरिका और इजरायल की टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि ईरान ने IAEA के निरीक्षकों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी है, जिससे दूरस्थ निगरानी ही एकमात्र विकल्प बचा है.
सैटेलाइट निगरानी पर पर्दा डालने की कोशिश?
इन नई छतों की वजह से सैटेलाइट्स के लिए जमीन पर चल रही गतिविधियों को ट्रैक करना कठिन हो गया है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इनका मकसद नए परमाणु निर्माण से ज्यादा, मलबे के नीचे दबे संवेदनशील उपकरणों और यूरेनियम स्टॉक को दुनिया की नजरों से बचाकर निकालना हो सकता है. फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज की एंड्रिया स्ट्रिकर के अनुसार, ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इजरायल या अमेरिका यह न देख सकें कि उनके हमलों में क्या-क्या बचा रह गया है.
नतांज और इस्फहान: क्यों हैं अहम?
नतांज, तेहरान से करीब 220 किलोमीटर दूर स्थित, ईरान का प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र रहा है जहां 60% तक संवर्धित यूरेनियम उत्पादित होता था. जून में इजरायल ने यहां की सतह वाली मुख्य इकाई को ध्वस्त किया था, जबकि अमेरिका ने भूमिगत हिस्सों पर बंकर-बस्टर बम गिराए. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि दिसंबर में नतांज में नई छत का काम शुरू हुआ और महीने के अंत तक पूरा हो गया, हालांकि वहां की बिजली व्यवस्था अभी भी बंद है.
इस्फहान में जनवरी की शुरुआत में समान छतें बनाई गईं. इजरायली सेना का दावा था कि यहां सेंट्रीफ्यूज उत्पादन से जुड़ी इकाइयों पर हमले किए गए थे. इसके अलावा, कुछ सुरंगों को मिट्टी से भरने और एक सुरंग को मजबूत करने का काम भी नजर आया. नतांज के पास पिकैक्स माउंटेन नामक जगह पर लगातार खुदाई दिख रही है, जहां विश्लेषकों का मानना है कि ईरान एक नई भूमिगत परमाणु सुविधा विकसित कर रहा है.
मिसाइल कार्यक्रम पर भी काम तेज
सैटेलाइट इमेज से यह भी जाहिर होता है कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े स्थलों पर पुनः सक्रिय हो गया है. तेहरान के नजदीक पारचिन सैन्य परिसर में 'तालेघान-2' नामक साइट को फिर से विकसित किया जा रहा है, जिसे पहले परमाणु हथियारों से संबंधित विस्फोटक परीक्षणों से जोड़ा गया था. विश्लेषकों का कहना है कि यह साइट अब पहले से अधिक मजबूत और हमलों के खिलाफ प्रतिरोधी बनाई जा रही है.
ईरान का दावा, पश्चिम की शंका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान द्वारा देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई का हवाला देते हुए, अमेरिकी सैन्य हमलों से बचने के लिए ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते पर बातचीत करने की बार-बार मांग कर रहे हैं. अमेरिका ने विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर को मध्य पूर्व में तैनात कर दिया है.
वहीं ईरान बार-बार दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. हालांकि पश्चिमी देशों और IAEA का कहना है कि 2003 तक ईरान के पास संगठित परमाणु हथियार कार्यक्रम था और आज भी उसके पास बम बनाने की तकनीकी क्षमता मौजूद है.


