पहलगाम हमले में आतंकियों के मोबाइल फोन से सामने आए कई राज, पाकिस्तान बैंक से जुड़े तार
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हुए आतंकी हमले से जुड़ी एक बड़ी अपडेट सामने आई है. हमले में शामिल आतंकियों के मारे जाने के बाद उनके पास से बरामद दो मोबाइल फोन अब जांच का अहम हिस्सा बन गए हैं.

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हुए आतंकी हमले से जुड़ी एक बड़ी अपडेट सामने आई है. बता दें, घटना की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को कुछ ऐसे सुराग मिले हैं, जिन्होंने मामले को और गंभीर बना दिया है. जांच एजेंसियों के अनुसार, हमले में शामिल आतंकियों के मारे जाने के बाद उनके पास से बरामद दो मोबाइल फोन अब जांच का अहम हिस्सा बन गए हैं. वहीं खबर हैं कि इन फोनो के जरिए पाकिस्तान से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण लिंक सामने आए हैं. क्या है पूरा मामला चलिए जानते है.
तीन आतंकियों मार गिराया
जानकारी के मुताबिक, 28 जुलाई 2025 को दचिगाम क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराया गया था. इस दौरान उनके कब्जे से दो स्मार्टफोन बरामद हुए थे. जांच में पता चला कि ये फोन पाकिस्तान में आयात किए गए थे और लंबे समय तक इनका इस्तेमाल नहीं किया गया. हालांकि बाद में पहलगाम हमले से इन फोन्स को एक्टिव किया गया था.
पाकिस्तानी बैंक से जुड़े तार
जांच एजेंसियों का कहना है कि फोन खरीदने और उन्हें लंबे समय तक बंद रखने के पीछे कोई सोची समझी साजिश हो सकती है. इसके साथ ही शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि एक फोन की सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों में कराची स्थित एक बैंक का नाम दर्ज था. हैरानी की बात यह है कि इस बैंक का नाम अतीत में कुछ ऐसे मामलों में भी सामने आ चुका है, जिनमें आतंकी संगठनों की फंडिंग की जांच की गई थी. हालांकि अब तक बैंक की किसी प्रत्यक्ष भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल, जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फोन आतंकियों तक कैसे पहुंचे.
सामने आई कुछ तरवीरें और लोकेशन
इसके साथ ही फोन की फोरेंसिक जांच के दौरान कुछ तस्वीरें, लोकेशन से जुड़े डेटा और नक्शे भी मिले हैं. इनमें एक टेंट की तस्वीर भी शामिल बताई जा रही है, जिससे आतंकियों की गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है. अधिकारियों के अनुसार, हमले से पहले आतंकी मुख्य रूप से लंबी दूरी के रेडियो संचार उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे थे.
इस दौरान मोबाइल फोन का उपयोग सीमित रखा गया, जिससे उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो सके। एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रही हैं. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हर सुराग की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.


