महाभियोग बहस में गूंजा सुप्रीम कोर्ट, कहा-रिपोर्ट पर नहीं कमेटी की वैधता पर बहस करो!

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश को चुनौती देने वाली अर्जी पर सुनवाई हुई। बहस के दौरान वकील कपिल सिब्बल के सवालों पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की और मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को स्पष्ट किया।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

National News: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग मामले पर सुनवाई हुई। यह मामला उस जांच रिपोर्ट पर आधारित है जिसमें वर्मा को कैश कांड में दोषी पाया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सिफारिश भेजी थी। वर्मा के वकील कपिल सिब्बल ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि आंतरिक जांच के आधार पर महाभियोग का प्रावधान नहीं है।
 

कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि तीन जजों की कमेटी बनाना सही नहीं था। उन्होंने दलील दी कि इस जांच का कानूनी आधार स्पष्ट नहीं है। सिब्बल ने कहा कि यह कमेटी असंवैधानिक है और इससे गलत उदाहरण स्थापित होगा। उनका मानना था कि बिना ठोस प्रक्रिया के महाभियोग की सिफारिश नहीं होनी चाहिए। इस दलील पर बेंच ने तीखे सवाल पूछे।

बेंच ने दिया कड़ा जवाब

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा कि इन-हाउस जांच की व्यवस्था 1999 में बनी थी। इसी आधार पर कार्रवाई की जाती है। बेंच ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश कोई डाकघर नहीं हैं। उनकी भी देश के प्रति जिम्मेदारी है। यदि उन्हें गड़बड़ी दिखे तो वह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सूचित कर सकते हैं।

मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी पर जोर

कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर अदालत ने पहले ही मन बना लिया है तो बहस का क्या मतलब। इस पर बेंच ने कहा कि हम आपकी दलीलें सुनेंगे और उसके बाद फैसला देंगे। कोर्ट ने कहा कि आप सिर्फ यह बताएं कि कमेटी असंवैधानिक थी या नहीं। रिपोर्ट की सामग्री पर चर्चा न करें।

फैसला रखा सुरक्षित

सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रख लिया। बेंच ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार की शक्तियों पर अभी विचार नहीं होगा। फिलहाल मुद्दा केवल जांच कमेटी की वैधता का है। कोर्ट जल्द इस पर निर्णय सुनाएगा। इस बीच कानूनी हलकों में इस मामले पर बहस जारी है।

फैसले पर टिकी निगाहें, न्यायपालिका में मचेगा भूचाल!

मामले का असर न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर गहरा पड़ सकता है। अगर कमेटी को असंवैधानिक ठहराया गया तो महाभियोग प्रक्रिया पर बड़ा असर पड़ेगा। वहीं अगर वैध माना गया तो वर्मा के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ेगी। सबकी नजरें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

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