भारत-यूएस ट्रेड डील पर आया रूस का रिएक्शन, तेल खरीद पर ट्रंप के दावे पर क्या बोला क्रेमलिन?
क्रेमलिन ने ट्रंप के दावे पर कहा कि भारत से रूसी तेल खरीद रोकने की कोई सूचना नहीं मिली. ट्रंप ने भारत-अमेरिका समझौते में टैरिफ 50% से 18% घटाने और रूसी तेल बंद करने का ऐलान किया, लेकिन मोदी ने केवल टैरिफ कटौती का स्वागत किया.

नई दिल्लीः रूस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसे नई दिल्ली से रूसी तेल खरीद बंद करने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की थी कि भारत के साथ नए व्यापार समझौते के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर रहा है, और बदले में भारत रूसी तेल की खरीद रोक देगा तथा अमेरिकी और संभवतः वेनेजुएला से तेल ज्यादा खरीदेगा.
ट्रंप का दावा
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद यह समझौता हुआ. उन्होंने दावा किया कि मोदी ने रूसी तेल खरीद बंद करने और अमेरिकी उत्पादों की ज्यादा खरीद का वादा किया है. ट्रंप ने इसे यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम बताया और कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अब और मजबूत होंगे.
समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25% दंडात्मक टैरिफ (रूसी तेल खरीद के कारण) को भी हटा दिया. पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर टैरिफ कटौती का स्वागत किया और ट्रंप को धन्यवाद दिया, लेकिन रूसी तेल पर कोई टिप्पणी नहीं की.
क्रेमलिन की प्रतिक्रिया
मंगलवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा, "इस मामले पर नई दिल्ली की ओर से हमें अभी तक कोई बयान या जानकारी नहीं मिली है." उन्होंने जोर दिया कि रूस-भारत रणनीतिक साझेदारी बहुत महत्वपूर्ण है और मॉस्को इसे मजबूत बनाना चाहता है. पेस्कोव ने कहा कि भारत एक संप्रभु देश है और वह अपने हितों के अनुसार व्यापार करता है. क्रेमलिन ने ट्रंप के दावे को सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित बताया और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करने की बात कही.
भारत की स्थिति
भारत ने समझौते में टैरिफ कटौती की पुष्टि की है, जिससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिली है. भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेजी देखी गई, खासकर टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और केमिकल सेक्टर में. हालांकि, रूसी तेल खरीद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया. विशेषज्ञों का मानना है कि अचानक रूसी तेल बंद करना भारत के लिए आर्थिक रूप से disruptive हो सकता है, क्योंकि रूस से सस्ता तेल मिल रहा है और इससे मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है.
भारत ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल आयात बढ़ाया था, जो अब उसका प्रमुख स्रोत है.ट्रंप ने पहले भी भारत पर दबाव बनाया था, लेकिन यह समझौता महीनों की बातचीत के बाद आया. भारत ने रूसी तेल खरीद को अपने ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा बताया है. क्रेमलिन की टिप्पणी से लगता है कि मॉस्को भारत के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है और किसी भी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार कर रहा है. यह घटना वैश्विक ऊर्जा व्यापार और भू-राजनीति में नया मोड़ ला सकती है, जहां अमेरिका दबाव बढ़ा रहा है और भारत संतुलन बनाए रखने की कोशिश में है.


