तनाव कम करने के लिए बातचीत करेंगे अमेरिका और ईरान, इस्तांबुल की मीटिंग के बाद क्या निकला नतीजा?
तुर्की इस्तांबुल में शुक्रवार को अमेरिका-ईरान उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी कर रहा है. मुख्य उद्देश्य तनाव कम करना, युद्ध टालना और परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू करना है. क्षेत्रीय देश शामिल, ट्रम्प की धमकियों के बाद पहली प्रमुख मुलाकात.

नई दिल्लीः तुर्की अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कवायद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है. इस्तांबुल में शुक्रवार को होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो पिछले साल गंभीर सैन्य टकराव के बाद पहली प्रमुख सार्वजनिक मुलाकात होगी. इस वार्ता का मुख्य मकसद क्षेत्र में युद्ध की आशंका को टालना और बातचीत के रास्ते खोलना है.
इस्तांबुल शिखर सम्मेलन की तैयारी
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान की मध्यस्थता में यह बैठक प्रस्तावित है. अमेरिकी पक्ष से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर हिस्सा लेंगे. ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल होंगे. कई क्षेत्रीय देशों के विदेश मंत्री भी मौजूद रह सकते हैं, जैसे पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, मिस्र, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात. तुर्की की यह पहल इसलिए अहम है क्योंकि वह दोनों पक्षों से अच्छे संबंध रखता है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में रुचि रखता है. बैठक का फोकस संघर्ष से बचाव, तनाव घटाने और परमाणु मुद्दे पर संभावित समझौते पर होगा.
बढ़ते तनाव की वजह
पिछले साल अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई. राष्ट्रपति ट्रम्प ने तेहरान को चेतावनी दी है कि अगर परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने वाला समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई हो सकती है. अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में भारी नौसैनिक ताकत भेजी है, जिससे युद्ध की आशंका बढ़ गई है. ट्रम्प ने हाल ही में कहा कि अगर डील नहीं हुई तो "बुरा होगा". ईरान में विरोध प्रदर्शन और आंतरिक अस्थिरता ने भी स्थिति को जटिल बनाया है.
अमेरिका की मांगें
अमेरिकी पक्ष ने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं ईरान का यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पाबंदी और क्षेत्रीय प्रॉक्सी गुटों को समर्थन रोकना. ईरान इन मांगों को अपनी संप्रभुता पर हमला मानकर खारिज करता रहा है. हालांकि, कुछ ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम उनकी सबसे बड़ी चिंता है, जबकि यूरेनियम संवर्धन पर कुछ लचीलापन दिख सकता है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि वे "निष्पक्ष और सम्मानजनक" बातचीत के लिए तैयार हैं, बशर्ते धमकियां न हों.
क्षेत्रीय प्रयास
तुर्की, कतर, मिस्र जैसे देशों ने सक्रिय मध्यस्थता की है. यह बैठक अगर सफल हुई तो क्षेत्र में शांति की नई उम्मीद जगाएगी. विटकॉफ पहले इजरायल जाकर प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मिलेंगे, जो वार्ता की तैयारी का हिस्सा है. हालांकि, बैठक का प्रारूप और नतीजे अभी अनिश्चित हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेदों को पाटना आसान नहीं होगा. कुल मिलाकर, इस्तांबुल की यह बैठक मध्य पूर्व की अस्थिरता को रोकने की आखिरी कोशिश लग रही है.


