पश्चिम बंगाल के 20 लाख सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, सुप्रीम कोर्ट का बकाया महंगाई भत्ता देने का आदेश

पश्चिम बंगाल में महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को जुलाई 2008 से 2019 तक का लंबित महंगाई भत्ता दिया जाना उनका अधिकार है और इसे टाला नहीं जा सकता.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम बंगाल में महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है. इस फैसले से राज्य के करीब 20 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों को बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को जुलाई 2008 से 2019 तक का लंबित महंगाई भत्ता दिया जाना उनका अधिकार है और इसे टाला नहीं जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या हवाला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार को बकाया डीए का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा 6 मार्च तक अनिवार्य रूप से जारी करना होगा. इसके साथ ही अदालत ने शेष राशि के भुगतान के तरीके और समय-सीमा तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का निर्देश दिया है, ताकि भुगतान की प्रक्रिया व्यवस्थित और व्यावहारिक ढंग से पूरी की जा सके.

अदालत के आदेश के तहत गठित समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा करेंगी. इस समिति में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोचन सिंह चौहान, न्यायमूर्ति गौतम विधूड़ी और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी शामिल किया गया है. यह समिति यह तय करेगी कि राज्य सरकार किस तरह चरणबद्ध तरीके से शेष बकाया डीए का भुगतान करे. सुप्रीम कोर्ट ने समिति को 16 मई तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई भी उसी दिन तय की गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? 

राज्य सरकार के अनुसार, इस फैसले के बाद उस पर करीब 43 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि महंगाई भत्ता कोई अनुग्रह नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है, जिसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

गौरतलब है कि इससे पहले मई 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया था कि वह जुलाई 2008 से लंबित डीए का भुगतान तीन महीने के भीतर करे. इस फैसले को ममता बनर्जी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इसी अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई को अंतरिम आदेश जारी कर राज्य सरकार को कुल बकाया डीए का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा तीन महीने के भीतर देने के निर्देश दिए थे.

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