सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: लोकपाल के आदेश पर लगाई रोक, हाई कोर्ट के जजों से संबंधित है मामला

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 जनवरी को भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल द्वारा पारित आदेश के बाद कड़ा संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई की थी। यह आदेश उस समय दिया गया था जब न्यायालय एक उच्च न्यायालय के वर्तमान अतिरिक्त न्यायाधीश के खिलाफ दायर दो शिकायतों पर सुनवाई कर रहा था।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को लोकपाल के उस आदेश पर रोक लगा दी , जिसमें कहा गया था कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत उसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की जांच करने का अधिकार है। लोकपाल के आदेश को "बहुत परेशान करने वाला" बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और लोकपाल के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया।

दो शिकायतों की सुनवाई के दौरान आया फैसला

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि लोकपाल की व्याख्या गलत है और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश लोकपाल के दायरे में नहीं आ सकते। लोकपाल का यह फैसला दो शिकायतों की सुनवाई के दौरान आया, जिनमें एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पर एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश तथा एक अन्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया था, जो एक कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई कर रहे थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कंपनी पहले उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की ग्राहक थी, जब वह वकील थे। न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली लोकपाल पीठ ने फैसला सुनाया कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी "लोक सेवक" की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं तथा लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम न्यायाधीशों को इससे बाहर नहीं रखता है। 

कार्रवाई कर दी थी स्थगित

लोकपाल ने इस मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश से मार्गदर्शन मांगा था और शिकायतों पर आगे की कार्रवाई स्थगित कर दी थी। लोकपाल ने कहा, "हम यह पूरी तरह स्पष्ट कर देते हैं कि इस आदेश के द्वारा हमने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर अंतिम रूप से निर्णय कर दिया है, क्या संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 2013 के अधिनियम की धारा 14 के दायरे में आते हैं।

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